सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा
1 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस MSCI रीबैलेंसिंग पर रहने वाला है। इंडेक्स में बदलाव प्रभावी होने के साथ कई शेयरों में फंड फ्लो बढ़ सकता है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Laurus Labs Adani Energy Solutions Lenskart और Groww जैसे शेयरों को इंडेक्स बदलाव से फायदा मिल सकता है जबकि Reliance Industries और Jio Financial Services जैसे बड़े शेयरों में आउटफ्लो का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार का मुख्य सूचकांक भले ही सीमित दायरे में रहे लेकिन कुछ खास शेयरों में तेज खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है।
MSCI रीबैलेंसिंग के साथ बाजार में नए Closing Auction Session को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू हुई है और 1 सितंबर का MSCI बदलाव इस नई व्यवस्था के लिए पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों में इंडेक्स से जुड़े बड़े फंड फ्लो आने पर कीमतों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर 31 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 95.1625 पर बंद हुआ और करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार में MSCI से जुड़े प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया।
बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों को सतर्क नजर रखनी होगी। HDFC Bank के शेयरों में हालिया कमजोरी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया है। 31 अगस्त को बैंक के शेयर में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं बाजार में वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर संकेत आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे माहौल में 1 सितंबर का कारोबार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट के बजाय शेयर आधारित गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार की तेजी देखकर खरीदारी करने या गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। खासतौर पर MSCI बदलाव से प्रभावित शेयरों में अचानक आने वाली हलचल को समझना जरूरी होगा। कुल मिलाकर नए महीने की शुरुआत घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजार कच्चे तेल रुपये और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बीच होने जा रही है और यही फैक्टर मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
