अमेरिकी चुनाव के नतीजों ने बदली बाजार की चाल, कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी
आज बाजार में तेजी के पीछे कई बड़े कारण रहे। सबसे प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट मानी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गई है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमत कम होने से देश के आयात बिल पर दबाव घट सकता है और महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। इसका सकारात्मक असर भारतीय कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने की संभावना है। खासतौर पर एविएशन और पेंट सेक्टर की कंपनियों के लिए सस्ता कच्चा तेल फायदेमंद माना जाता है।
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने भी वैश्विक बाजारों का माहौल बदलने में अहम भूमिका निभाई है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच नई उम्मीद पैदा हुई है। बाजार को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावना से कच्चे तेल की आपूर्ति और वैश्विक कारोबार को लेकर बनी चिंताएं कुछ कम हुई हैं। इसका फायदा भारतीय शेयर बाजार को भी मिला है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी ने भी बाजार की तेजी को मजबूती दी है। उपलब्ध अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में करीब 7284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदारी की। विदेशी पूंजी का बाजार में वापस आना निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने वाला संकेत माना जा रहा है।
सेक्टर के लिहाज से देखें तो आज बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ ऑटो और रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों में मजबूती रही। एशियन पेंट्स और बजाज फाइनेंस के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के कुछ शेयरों में दबाव बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली जिससे बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत मिला।
निवेशकों के लिए आज का कारोबार उत्साह बढ़ाने वाला जरूर है लेकिन बाजार की इस तेजी को देखकर जल्दबाजी में निवेश करना समझदारी नहीं होगी। शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों का जोखिम हमेशा बना रहता है। निवेश करने से पहले कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति का आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों और अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं नए निवेशकों को बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय सोच समझकर और जरूरत के अनुसार निवेश करना चाहिए। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
