July 11, 2026

वैश्विक तेल बाजार में मांग सुधार के संकेत, आईईए ने कहा- खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति से ही लौटेगी कच्चे तेल बाजार की स्थिरता

0
31-1783770375
नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी ताजा ऑयल मार्केट रिपोर्ट में वैश्विक कच्चे तेल की मांग में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिए हैं। एजेंसी का कहना है कि गर्मियों के दौरान यात्रा गतिविधियों में वृद्धि और पहले से दबे उपभोक्ता मांग के बाजार में लौटने से आने वाले महीनों में तेल की खपत बढ़ने की संभावना है। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लाने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति और समुद्री आपूर्ति मार्गों का निर्बाध संचालन अत्यंत आवश्यक होगा।

रिपोर्ट के अनुसार मई में वैश्विक तेल मांग घटकर लगभग 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई थी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद आईईए का अनुमान है कि अक्टूबर तक मांग में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह फरवरी के बाद पहली बार पिछले वर्ष के स्तर से ऊपर पहुंच सकती है। एजेंसी का मानना है कि पर्यटन गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र में बढ़ती ईंधन खपत इस सुधार की प्रमुख वजह बनेगी।

आईईए ने वर्ष 2026 और 2027 के लिए भी तेल मांग का आकलन प्रस्तुत किया है। एजेंसी के अनुसार 2026 में वैश्विक तेल मांग में कुछ कमी देखने को मिल सकती है, जबकि उसके बाद 2027 में मांग दोबारा मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार मध्यम अवधि में फिर से संतुलन की ओर बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष के अंत तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है। हालांकि यह स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल टैंकरों की आवाजाही कितनी तेजी से सामान्य होती है। यदि परिवहन पूरी तरह बहाल होता है तो तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे।

आईईए ने हाल के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि खाड़ी क्षेत्र में फिर से बढ़ा तनाव यह दर्शाता है कि स्थायी शांति के बिना ऊर्जा बाजार में दीर्घकालिक स्थिरता संभव नहीं होगी। एजेंसी के अनुसार किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या आपूर्ति मार्गों में व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आपूर्ति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक जून के दौरान वैश्विक तेल भंडार में चार महीने बाद पहली बार वृद्धि दर्ज की गई। समुद्र में मौजूद भंडार बढ़ने से कुल स्टॉक में इजाफा हुआ, हालांकि कई देशों में भूमि आधारित भंडार में गिरावट भी देखने को मिली। विशेष रूप से कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी और वाणिज्यिक भंडार दोनों में कमी दर्ज की गई, जिससे बाजार की स्थिति मिश्रित बनी रही।

आईईए ने यह भी बताया कि जून में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बाद कीमतों में फिर तेजी देखी गई। एजेंसी का मानना है कि भले ही कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ रही हो, लेकिन रिफाइनरियों का संचालन और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसे में आने वाले महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक परिस्थितियों, समुद्री आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा और प्रमुख उत्पादक देशों की उत्पादन रणनीति पर निर्भर करेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *