June 20, 2026

कीमती धातुओं में जोरदार गिरावट: सोना हुआ 2,800 रुपये सस्ता, चांदी में 10 हजार रुपये से ज्यादा की कमी ने बढ़ाई खरीदारी की उम्मीद

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नई दिल्ली । देशभर के सर्राफा और बुलियन बाजार में इस सप्ताह कीमती धातुओं की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को राहत मिली है। सप्ताह भर के कारोबार के दौरान सोने और चांदी दोनों में लगातार कमजोरी देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप सोना हजारों रुपये सस्ता हुआ जबकि चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक निवेशकों की बदलती रणनीतियों का सीधा प्रभाव इन धातुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में सप्ताह भर के दौरान करीब 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली। लगातार गिरते दामों ने उन उपभोक्ताओं को राहत दी है जो शादी-विवाह, निवेश या आभूषण खरीदारी के लिए उचित अवसर का इंतजार कर रहे थे।

बाजार में सोने की कीमतों ने सप्ताह के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी देखे। शुरुआती दिनों में जहां भाव अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बने रहे, वहीं सप्ताह के अंत तक लगातार बिकवाली के दबाव ने कीमतों को नीचे ला दिया। कारोबारियों के अनुसार निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में अपनी कुछ हिस्सेदारी कम की, जिससे बाजार में कमजोरी बढ़ी।

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह भर में चांदी के दाम में 10,000 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधियों से प्रभावित होने वाली चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव अक्सर सोने की तुलना में अधिक होता है और मौजूदा गिरावट उसी प्रवृत्ति को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर सोना और चांदी दोनों कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहे हैं। आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती ने निवेशकों के रुझान को प्रभावित किया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग पर दबाव पड़ता है, क्योंकि अन्य मुद्राओं में इनकी खरीद अपेक्षाकृत महंगी हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी या लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने की संभावना से निवेशकों का झुकाव अन्य वित्तीय साधनों की ओर बढ़ सकता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में बुलियन बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।

हालांकि बाजार विश्लेषकों का यह भी मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौर को अवसर के रूप में देखा जा सकता है। सोना और चांदी परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और आर्थिक अनिश्चितता के समय इनकी मांग फिर बढ़ सकती है। ऐसे में मौजूदा स्तरों पर खरीदारी को लेकर निवेशकों की रुचि भी बढ़ने की संभावना है।

सर्राफा कारोबारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है तो कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल, कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट ने खरीदारों को राहत और निवेशकों को नए अवसर तलाशने का मौका जरूर दिया है।

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