शेयर बाजार में कमाई का मौका या मंडरा रहा बड़ा जोखिम? निवेश से पहले समझें मार्केट के ये संकेत
शेयर बाजार की शुरुआत पर सबसे पहले वैश्विक बाजारों के संकेतों का असर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों की चाल से भारतीय बाजार का शुरुआती रुख प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। अगर वैश्विक माहौल सकारात्मक रहता है तो बाजार में खरीदारी का समर्थन मिल सकता है जबकि कमजोर संकेतों की स्थिति में दबाव देखने को मिल सकता है।
घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजे आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और सरकार से जुड़े बड़े फैसले भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाते हैं। किसी बड़ी कंपनी से जुड़ी सकारात्मक खबर उसके शेयर में तेजी ला सकती है जबकि कमजोर नतीजे या नकारात्मक खबर से संबंधित शेयर पर दबाव बन सकता है। इसलिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा देखने के बजाय निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों से जुड़ी खबरों पर भी नजर रखनी चाहिए।
बाजार में उतार चढ़ाव के दौरान सबसे ज्यादा जरूरी निवेशकों का धैर्य होता है। कई बार शुरुआती कारोबार में तेज तेजी या गिरावट दिखाई देती है लेकिन बाद में बाजार की दिशा बदल सकती है। ऐसे में केवल कुछ मिनट या कुछ घंटों की चाल देखकर बड़ा निवेश फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। खासतौर पर नए निवेशकों को बिना जानकारी के किसी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।
अगर बाजार में तेजी आती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि हर शेयर में बढ़त देखने को मिलेगी। इसी तरह बाजार में गिरावट आने पर भी सभी कंपनियों के शेयर एक समान नहीं गिरते। कंपनी के कारोबार उसकी वित्तीय स्थिति भविष्य की संभावनाओं और सेक्टर की स्थिति का शेयर की कीमत पर अलग प्रभाव पड़ता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के मूलभूत आंकड़ों को समझना जरूरी है।
निवेशकों को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की छोटी अवधि की हलचल से ज्यादा प्रभावित होने के बजाय मजबूत कंपनियों और अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान दे सकते हैं। वहीं ट्रेडिंग करने वालों के लिए स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन जैसे पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
शेयर बाजार में मुनाफे की संभावना के साथ जोखिम भी जुड़ा रहता है। किसी शेयर या इंडेक्स की भविष्य की चाल की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसलिए निवेश से पहले खुद रिसर्च करना और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर माना जाता है। बाजार में धैर्य और अनुशासन के साथ लिया गया फैसला जल्दबाजी में किए गए निवेश से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
