September 18, 2026

शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

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