वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल
हाल ही में इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में फार्मा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल ने किया। बैठक में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करने तथा भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया गया।
बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास, क्लीनिकल रिसर्च और उन्नत उपचार तकनीकों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। चर्चा में यह भी माना गया कि यदि इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित किया जाता है तो भारत का फार्मा इनोवेशन इकोसिस्टम और मजबूत होगा तथा नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास को गति मिलेगी। इससे देश की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।
पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ मिलकर ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहती है, जहां नवाचार को प्रोत्साहन मिले और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़े। उनका मानना है कि अनुसंधान आधारित विकास ही भविष्य में भारतीय फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास की इस प्रक्रिया में आम नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना समान रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग पहले से ही दुनिया के प्रमुख दवा उद्योगों में गिना जाता है। विशेष रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुनिया के अनेक देशों में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी कारण सरकार घरेलू विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार पहल कर रही है।
फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के हालिया कारोबारी आंकड़े भी इस उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाते हैं। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे दर्ज किए गए। बड़े विदेशी अधिग्रहण को अलग रखने के बाद भी कुल सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक रहा, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
इसी अवधि में विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। कुल 35 एमएंडए सौदों का मूल्य 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेनदेन की संख्या में तिमाही आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल सौदों का मूल्य अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि कुल एमएंडए मूल्य में लगभग 96 प्रतिशत योगदान विदेशी अधिग्रहणों का रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत कर रही हैं।
