July 27, 2026

नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ

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नई दिल्ली।
पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब लगभग साफ माना जा रहा है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। अब मामला मुख्य रूप से ब्रिटेन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर है, जिसके पूरा होने के बाद उसे भारत लाए जाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों से राहत नहीं मिलने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी, जिससे उसके प्रत्यर्पण की राह में मौजूद अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है। अब ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं।

इससे पहले ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की सुरक्षा, कैद की परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसे असाधारण हालात नहीं हैं, जिनके आधार पर प्रत्यर्पण रोका जाए।

नीरव मोदी ने अपनी याचिकाओं में यह तर्क दिया था कि भारत लौटने पर उसे प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों और भारतीय पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए अदालत में विस्तृत तथ्य और सुरक्षा संबंधी आश्वासन प्रस्तुत किए। इन्हीं आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को वैध माना।

यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में दायर याचिका की सुनवाई गोपनीय रही। अदालत ने प्रक्रिया के दौरान मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अब वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद राजनयिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि कानूनी दृष्टि से प्रत्यर्पण के खिलाफ कोई बड़ा अवरोध शेष नहीं बचा है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर नीरव मोदी को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं ताकि भारत में उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

ब्रिटेन की अदालतों में नीरव मोदी ने अपने पक्ष में कई कानूनी दलीलें दी थीं। इनमें भारत की जेलों की स्थिति, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे और पूर्व के कुछ मामलों का हवाला भी शामिल था। लेकिन अदालत ने प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसके तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अब माना जा रहा है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है, जिससे देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में कानूनी कार्रवाई को नई गति मिल सकती है।

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