April 24, 2026

भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री नई ऊंचाई पर: वित्त वर्ष 26 में AUM में जोरदार उछाल

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नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस दौरान इंडस्ट्री के कुल एसेट बेस में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की रुचि मजबूत बनी हुई है। मार्च में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत देता है कि निवेशक बाजार में गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं और लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश कर रहे हैं।

सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बावजूद नियमित और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इक्विटी इनफ्लो में यह वृद्धि मुख्य रूप से वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग, बाजार में हालिया गिरावट और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण हुई है। निवेशकों ने गिरावट के समय खरीदारी को अवसर माना है, जिससे बाजार में फंड फ्लो मजबूत हुआ है।

हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखा गया था। डेट म्यूचुअल फंड्स में भी भारी आउटफ्लो देखने को मिला, जो 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह उतार-चढ़ाव बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता को दर्शाता है।

गोल्ड ETF में निवेश भी घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपये था। वहीं इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिनमें 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, जो क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपये और 6,063.53 करोड़ रुपये रहा। लार्ज-कैप फंड्स में भी 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और निवेशक अब लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बाजार की स्थिरता और गहराई दोनों बढ़ रही हैं।

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