कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार
नए प्रावधान के तहत कोयला ब्लॉक आवंटी अब अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी अनिवार्यता पूरी करने के लिए बैंक गारंटी या बीमा श्योरिटी बॉन्ड, दोनों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकेंगे। यह सुविधा केवल नए आवंटियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से आवंटित कोयला ब्लॉकों पर भी लागू होगी। ऐसे आवंटी निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से जमा बैंक गारंटी को बीमा श्योरिटी बॉन्ड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय दबाव में कमी आएगी। अब कंपनियों को बड़ी राशि बैंक गारंटी के रूप में लंबे समय तक रोककर नहीं रखनी पड़ेगी। इससे उनके पास उपलब्ध पूंजी का उपयोग खदानों के विकास, आधारभूत ढांचे के निर्माण, मशीनरी की खरीद और परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना भी है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड के विकल्प से कंपनियों के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और उन्हें अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस व्यवस्था के बावजूद निष्पादन सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी हित पूरी तरह सुरक्षित बने रहेंगे।
प्रारंभिक चरण में यह सुविधा उन कोयला ब्लॉकों के लिए लागू की जाएगी जिनका आवंटन खान एवं खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत किया गया है। इसके बाद सरकार इस व्यवस्था का विस्तार अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और आधुनिक वित्तीय ढांचा विकसित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से कोयला क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। परियोजनाओं के समयबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा नई खदानों के संचालन में आने वाली वित्तीय बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भविष्य में कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकेगा, जबकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपेक्षित गति आने की उम्मीद है।
