सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ
क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों के सूचकांक में 144 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों के पास मौजूद सोने का मूल्य काफी बढ़ गया, जिसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान उसी सोने के बदले 200 प्रतिशत तक अधिक लोन राशि स्वीकृत कर रहे हैं।
गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में तेज उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें पर्सनल लोन और कार लोन जैसे अन्य खुदरा ऋण भी शामिल हैं। यह वृद्धि बताती है कि लोग अब अपनी पारंपरिक संपत्ति सोने को नकदी में बदलने के लिए अधिक सक्रिय हो गए हैं।
कारोबार तीन गुना तक पहुंचा
देश में गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेज गति से बढ़ा है। यह मार्च 2023 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 19.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
देशभर में बढ़ी मांग
गोल्ड लोन अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बार-बार गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब इसे एक नियमित वित्तीय विकल्प की तरह उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही अब लोग लंबी अवधि की बजाय कम समय के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने की प्रवृत्ति अपना रहे हैं।
चुकौती में सुधार, डिफॉल्ट में कमी
तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार के बावजूद ऋण चुकौती की स्थिति में सुधार देखा गया है। 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट के मामले मार्च 2023 में 0.4 प्रतिशत थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 0.2 प्रतिशत रह गए हैं। यह संकेत देता है कि लोन बाजार का विस्तार सुरक्षित और अनुशासित तरीके से हो रहा है।
खुदरा ऋण में बढ़ती हिस्सेदारी
वित्त वर्ष 2023-24: 20%
वित्त वर्ष 2024-25: 30%
वित्त वर्ष 2025-26: 41%
