ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित
कवच भारत में विकसित एक आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जिसे रेलवे संचालन के दौरान होने वाले संभावित खतरों को समय रहते पहचानने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह तकनीक खासतौर पर सिग्नल पासिंग एट डेंजर यानी एसपीएडी जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करती है। यदि किसी कारणवश ट्रेन चालक खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति में पहुंचता है तो सिस्टम आवश्यक परिस्थितियों में स्वतः हस्तक्षेप कर सकता है।
कवच 4.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त और उन्नत परत प्रदान करता है। असुरक्षित स्थिति बनने पर यह सिस्टम जरूरत के अनुसार अपने आप ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। खराब दृश्यता या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके जरिए आमने सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर के खतरे को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कवच सिस्टम के विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है। रेलवे लगातार अपनी सिग्नलिंग व्यवस्था और ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक तकनीक से मजबूत कर रही है। मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर हिस्से में कवच 4.0 की तैनाती से इस महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर यात्रियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2014-15 में जहां ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी वहीं 2025-26 में यह घटकर 16 रह गई। चालू वित्तीय वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी गई है। प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स भी 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 तक पहुंच गया है।
रेलवे ने सुरक्षा पर खर्च भी लगातार बढ़ाया है। 2013-14 में सुरक्षा संबंधी कार्यों पर करीब 39 हजार 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे जबकि 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1 लाख 20 हजार 389 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा हजारों स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम तथा ट्रैक सर्किटिंग जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
कुल मिलाकर 170 करोड़ रुपए की नई मंजूरी केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि भारतीय रेलवे की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें भविष्य की रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कवच 4.0 के विस्तार के साथ रेलवे का लक्ष्य है कि तकनीक के जरिए मानवीय भूल और परिचालन संबंधी जोखिमों को कम किया जाए ताकि करोड़ों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।
