June 1, 2026

भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद

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नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तेज़ी आने की उम्मीद है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाना है।

सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का ओमान को निर्यात करीब 4.06 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाने और मध्य अवधि में 10 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।

समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इसका लाभ भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को मिलेगा। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता उद्योग, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

वहीं भारत ने भी ओमान के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान के भारत को होने वाले आयात का लगभग 94.81 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि ओमान का सेवा आयात लगभग 12.52 अरब डॉलर का है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

भारत और ओमान ने इस समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा भारत हाल के वर्षों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा चुका है।

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