जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
नई दिल्ली ।भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में नई दिशा देने के उद्देश्य से व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक मॉस्को में हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए और कई प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
दो दिवसीय रूस यात्रा पर पहुंचे जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों में लगातार मजबूती और अनुकूलन क्षमता दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच आपसी हित और विश्वास को रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया गया।
जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 13 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार में यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है।
विदेश मंत्री ने बताया कि व्यापार घाटे का अंतर करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने इस असंतुलन को दूर करना भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए नए अवसर तलाशने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मानव संसाधन की आवाजाही जैसे क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया। जयशंकर ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी माहौल में दोनों देशों को नए क्षेत्रों की संभावनाओं की पहचान करते हुए सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा।
उन्होंने भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार सरकारें व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन में कारोबारी क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका रहती है। इसलिए संस्थागत तंत्र को उद्योग की प्राथमिकताओं के साथ लगातार जोड़े रखने की आवश्यकता है।
जयशंकर ने कहा कि अंतर-सरकारी आयोग के विभिन्न कार्य समूहों और उप-समूहों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने समस्या समाधान और व्यावहारिक परिणामों को भविष्य की बैठकों की सफलता का प्रमुख आधार बताया।
बैठक के बाद जयशंकर ने मंटुरोव को आयोग की सह-अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया और चर्चा को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बैठक उपयोगी रही। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने तथा नई तकनीकी और रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी विकसित करने पर दोनों पक्षों का जोर रहा।
