खाड़ी संकट का असर: GAIL ने Yelahanka Power Plant को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन पर असर संभव
कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित प्लांट
यह 370 मेगावाट क्षमता वाला बिजली संयंत्र Karnataka Power Corporation Limited (केपीसीएल) द्वारा स्थापित किया गया है। यह कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित पावर प्लांट है और मुख्य रूप से Bengaluru शहर को बिजली आपूर्ति के लिए बनाया गया था। यह संयंत्र पिछले साल दिसंबर से लगातार संचालन में था, लेकिन गैस आपूर्ति रुकने के बाद बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पश्चिम एशिया संकट से गैस की कमी
अधिकारियों के अनुसार West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से Israel–Iran conflict के कारण प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में भी गैस की उपलब्धता कम हो गई है और सरकार को विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैस आवंटन की प्राथमिकता तय करनी पड़ी है।
बिजली क्षेत्र को मिली सबसे कम प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने गैस आवंटन के लिए हाल ही में एक गजट अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत घरेलू खपत को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद परिवहन और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है, जबकि बिजली उत्पादन को सबसे निचली श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि गैस की कमी रहने तक बिजली संयंत्रों को सीमित सप्लाई ही मिल पाएगी।
कर्नाटक में बिजली की मांग
फिलहाल कर्नाटक में प्रतिदिन लगभग 35.5 करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट के अलावा सौर और पवन ऊर्जा स्रोतों का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही केंद्रीय ग्रिड से मिलने वाली बिजली और पावर एक्सचेंज व्यवस्था के माध्यम से भी अतिरिक्त बिजली ली जा रही है।
अन्य राज्यों से भी मिल रही बिजली
राज्य सरकार बिजली आपूर्ति को बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों के साथ पावर एक्सचेंज व्यवस्था का भी सहारा ले रही है। इसके तहत Punjab, Uttar Pradesh और Haryana जैसे राज्यों से भी कुछ मात्रा में बिजली प्राप्त की जा रही है।
गैस संकट जारी रहने पर असर संभव
अधिकारियों का कहना है कि अगर Yelahanka Gas-based Power Plant को गैस सप्लाई और कम हुई या लंबे समय तक बंद रही, तो बिजली आपूर्ति पर हल्का असर पड़ सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अन्य स्रोतों से उत्पादन बढ़ाकर बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी।
गैस आवंटन के नए नियम
Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 के तहत सरकार ने गैस आवंटन के लिए विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकता श्रेणियों में रखा है। इसमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, एलपीजी उत्पादन, परिवहन के लिए सीएनजी और पाइपलाइन संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 100 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा।
अन्य क्षेत्रों को सीमित आपूर्ति
उर्वरक संयंत्रों को दूसरी प्राथमिकता में रखा गया है और उन्हें औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस मिलेगा। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को तीसरी प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं बिजली उत्पादन क्षेत्र को सबसे निचली प्राथमिकता दी गई है, जिसके कारण गैस की कमी के दौरान इस क्षेत्र को सीमित आपूर्ति ही मिलने की संभावना है।
