July 22, 2026

ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से ई10 मानक के अनुसार तैयार किए गए कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और उपलब्ध तकनीकी जानकारी इसके विपरीत संकेत देती है।

सरकार के अनुसार ई10 मानक के अनुरूप तैयार किए गए पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में सामान्यतः लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट सीमित मानी गई है और इसे वाहन की समग्र कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस बदलाव को केवल एथेनॉल मिश्रण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि माइलेज कई अन्य तकनीकी और परिचालन संबंधी कारणों से भी प्रभावित होता है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज चालक की ड्राइविंग शैली, वाहन के नियमित रखरखाव, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट, इंजन की स्थिति और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसी अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी वाहन की ईंधन दक्षता में बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

सरकार ने यह भी बताया कि ई20 पेट्रोल के कई तकनीकी लाभ हैं। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, जिससे इंजन में बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन प्राप्त होता है। इसके साथ ही ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन का संचालन अधिक स्मूथ रहता है और एक्सीलरेशन भी बेहतर महसूस हो सकता है। सरकार का मानना है कि इन विशेषताओं के कारण आधुनिक वाहनों के लिए ई20 मिश्रित ईंधन एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है।

हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इंजन खराब होने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे कई दावे सामने आए थे। इन आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने दोहराया कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो। सरकार का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षण और अनुभव ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यदि किसी वाहन को इस ईंधन से वास्तविक नुकसान हुआ हो तो उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई20 को लेकर कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करना है।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण ई20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

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