July 30, 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

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नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बदले निवेश रुझान के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कारोबार के दौरान यह अपने शुरुआती स्तर से भी नीचे फिसल गया। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए बड़े निवेश से बच रहे हैं।

चांदी के वायदा अनुबंध में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ होने के बाद इसकी कीमत दो लाख तीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे इसकी कीमतों में और नरमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना रहा। वैश्विक निवेशकों ने जोखिम से जुड़े परिसंपत्तियों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी सतर्क रुख अपनाया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों की प्राथमिकता लगातार बदल रही है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में विभिन्न वैश्विक घटनाक्रम निवेश निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का माना जा रहा है। क्षेत्र में हालिया घटनाओं के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान कमोडिटी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। निवेशक लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी निवेश रणनीति में बदलाव करते हैं। यही कारण है कि एक ओर ऊर्जा बाजार में तेजी देखने को मिल रही है, जबकि दूसरी ओर कीमती धातुओं में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

आने वाले दिनों में सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कमोडिटी बाजार में भी स्थिरता लौटने की संभावना है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतों, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करेंगे।

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