भारत की आर्थिक रफ्तार पर वैश्विक भरोसा बढ़ा, WEF ने 6.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताकर दिया बड़ा संकेत
रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत समेत दुनिया के 10 प्रमुख क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से जुड़े 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों की राय ली गई।
भारत को लेकर विशेषज्ञों का भरोसा मई की तुलना में बढ़ा है। सितंबर की रिपोर्ट में 74 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था। वहीं 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम मध्यम स्तर या उससे बेहतर रह सकती है।
रिपोर्ट में रोजगार की स्थिति को लेकर अपेक्षाकृत स्थिर तस्वीर सामने आई है। करीब 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक वर्ष में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि 17 प्रतिशत विशेषज्ञ बेरोजगारी बढ़ने और 13 प्रतिशत इसमें कमी आने का अनुमान लगा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई में 5.1 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 5 प्रतिशत रह गई। इसी दौरान श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच श्रम बाजार के अपेक्षाकृत स्थिर रहने का संकेत देते हैं। हालांकि रोजगार के नए अवसर पैदा करने की गति बनाए रखना अभी भी महत्वपूर्ण माना गया है।
महंगाई के मोर्चे पर भी विशेषज्ञों की चिंता मई के मुकाबले कम हुई है। अगले 12 महीनों को लेकर 55 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने मध्यम महंगाई की संभावना जताई है, जबकि 45 प्रतिशत ने उच्च महंगाई की आशंका व्यक्त की है। मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञ उच्च या बहुत उच्च महंगाई को लेकर चिंतित थे।
अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.8 प्रतिशत रही। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन 2 से 6 प्रतिशत के निर्धारित दायरे में बनी हुई है।
मौद्रिक नीति को लेकर 67 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं 24 प्रतिशत विशेषज्ञों ने नीति के और सख्त होने की संभावना जताई है। अगस्त में RBI ने नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए तटस्थ रुख कायम रखा था।
राजकोषीय नीति को लेकर भी 72 प्रतिशत विशेषज्ञों ने बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई। करीब 22 प्रतिशत ने कुछ नरम रुख अपनाए जाने की संभावना व्यक्त की।
रिपोर्ट का सर्वेक्षण 20 अगस्त को पूरा हुआ था। इसके बाद 31 अगस्त को जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। इस प्रदर्शन के बाद कई वैश्विक संस्थानों ने भारत के विकास अनुमान में बदलाव किया है।
मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।
