वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप
हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्यातक और किसानों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना समय की मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से खुले नए बाजारों का लाभ उठाने की रणनीति पर भी बल दिया गया।
मत्स्य पालन क्षेत्र के आंकड़े भी इस विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। देश में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के लगभग 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में करीब 198 लाख टन तक पहुंच चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सहायक रही है बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा अब भी सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल रही है। सरकार इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश और सहायता उपलब्ध करा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात वृद्धि के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, रोग प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों का पालन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।
समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में परिवहन और एयर कार्गो अवसंरचना की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च मूल्य वाले उत्पादों को तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक कार्गो सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियां भारत को वैश्विक सीफूड व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।
आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार विस्तार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत न केवल अपने निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है बल्कि वैश्विक समुद्री उत्पाद व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भी उभर सकता है।
