एसएचजी सेविंग्स अकाउंट से वित्तीय समावेशन को मिलेगा नया बल..
यह खाता पूरी तरह जीरो बैलेंस सुविधा के साथ उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसी भी प्रकार की न्यूनतम राशि रखने की बाध्यता समाप्त हो जाती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी बिना किसी दबाव के इसका उपयोग कर सकता है। इस खाते को खोलने की प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाया गया है, जिससे इसे गांवों में भी आसानी से शुरू किया जा सकता है।
इसके लिए डाकघर नेटवर्क और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत डाक सेवकों की मदद ली जा रही है, ताकि बैंकिंग सेवाएं सीधे लोगों तक पहुंच सकें और उन्हें किसी लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। इस खाते में कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनमें मासिक औसत बैलेंस रखने की आवश्यकता नहीं होना, अधिकतम दो लाख रुपये तक की जमा सीमा, नियमित अंतराल पर ब्याज का लाभ और बिना किसी शुल्क के कैश जमा और निकासी की सुविधा शामिल है। इसके अलावा खाताधारकों को हर महीने निःशुल्क स्टेटमेंट प्रदान किया जाएगा, जिससे उनके लेनदेन की जानकारी पारदर्शी बनी रहे।
खाता बंद करने पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए क्यूआर कार्ड की सुविधा भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कैशलेस व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
यह पहल विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ये समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य करते हैं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस सुविधा के माध्यम से इन समूहों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर उनके लेनदेन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
इससे न केवल बचत की आदत को बढ़ावा मिलेगा बल्कि छोटे स्तर पर चल रही आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए यह कदम वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल नेटवर्क की मदद से अब बैंकिंग सेवाएं सीधे घरों और गांवों तक पहुंचेंगी, जिससे लोगों को बैंक शाखाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
यह पहल ग्रामीण विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है और आने वाले समय में इससे व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
