July 24, 2026

आईपीओ, फिर भी मजबूत निवेश, एसएमई कंपनियों ने छह महीने में 3,752 करोड़ रुपये जुटाकर दिखाया भरोसा

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नई दिल्ली । देश के लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) पूंजी बाजार के माध्यम से निवेश जुटाने में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान 78 एसएमई कंपनियों ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए कुल 3,752 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई। आईपीओ की संख्या पिछले दो वर्षों की समान अवधि की तुलना में कम रही, लेकिन निवेश जुटाने का स्तर मजबूत बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब गुणवत्ता आधारित कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं और मजबूत कारोबारी मॉडल वाली कंपनियों को बाजार से पर्याप्त समर्थन मिल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार जुटाई गई कुल राशि में सबसे बड़ा योगदान फ्रेश इश्यू का रहा। नई इक्विटी जारी कर कंपनियों ने लगभग 3,555 करोड़ रुपये जुटाए, जो कुल इश्यू आकार का करीब 95 प्रतिशत है। दूसरी ओर, ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए केवल 197 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय अपने विस्तार, नई परियोजनाओं और कारोबार को बढ़ाने के लिए ताजा पूंजी जुटाने पर अधिक जोर दे रही हैं।

हालांकि आईपीओ की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में 88 और वर्ष 2024 की पहली छमाही में 116 एसएमई आईपीओ आए थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर 78 रह गई। इसके बावजूद कुल जुटाई गई राशि में केवल मामूली गिरावट आई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में एसएमई कंपनियों ने 4,004 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह अंतर दर्शाता है कि बाजार में कम लेकिन अपेक्षाकृत बड़े और मजबूत आईपीओ आ रहे हैं, जिन्हें निवेशकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही, यानी अप्रैल से जून के बीच 38 एसएमई कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुईं। इन कंपनियों ने लगभग 1,891 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में जुटाई गई 1,644 करोड़ रुपये की राशि से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है और विकास की संभावनाओं वाली कंपनियों को पूंजी जुटाने में अपेक्षाकृत आसानी हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में एसएमई आईपीओ गतिविधियों में असाधारण तेजी देखने को मिली थी, जबकि मौजूदा वर्ष में बाजार अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में पहुंच गया है। अब निवेशकों का ध्यान केवल बड़ी संख्या में आने वाले आईपीओ पर नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर है जिनकी वित्तीय स्थिति, विकास की योजना और कारोबारी संभावनाएं मजबूत हैं। यही कारण है कि कम लिस्टिंग के बावजूद पूंजी जुटाने की क्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

विश्लेषकों के अनुसार एसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और पूंजी बाजार तक इसकी आसान पहुंच आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मजबूत आईपीओ बाजार से इन कंपनियों को विस्तार, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते हैं। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि निवेशकों का भरोसा गुणवत्ता वाली एसएमई कंपनियों पर कायम है और आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रहने की संभावना है।

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