केंद्र की पीएलआई योजनाओं से फार्मा और मेडटेक विनिर्माण को बढ़ावा, निवेश और घरेलू उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी
बल्क ड्रग्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 6,940 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया। योजना के तहत 41 महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू निर्माण को मजबूत करने और एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स तथा अन्य जरूरी कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य रखा गया।
जून 2026 तक इस योजना के तहत 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। यह निर्धारित 4,330 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य से अधिक है। योजना के तहत 28 एपीआई के विनिर्माण के लिए 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इसके चलते पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण फर्मेंटेशन आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन भी संभव हुआ है।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए अलग पीएलआई योजना को 2021 में मंजूरी दी गई थी। इस योजना के लिए 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान रखा गया। इसका उद्देश्य देश की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है।
इस योजना में बायोफार्मास्युटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, पेटेंटेड और पेटेंट-मुक्त दवाएं, ऑर्फन ड्रग्स, ऑटो-इम्यून दवाएं तथा अन्य उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पाद शामिल हैं। योजना के तहत 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 एमएसएमई हैं। जून 2026 तक 46,744 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ, जबकि निर्धारित लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपये था।
फार्मा क्षेत्र की कई कंपनियों ने योजना के तहत कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, बायोसिमिलर, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण के लिए अपनी क्षमता बढ़ाई है।
मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के लिए वर्ष 2020 में पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 3,420 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया। योजना के तहत भारत में निर्मित पात्र मेडिकल डिवाइस की अतिरिक्त बिक्री पर पांच साल तक पांच प्रतिशत प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।
इस योजना के जरिए कई ऐसे उच्च तकनीक वाले मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन शुरू हुआ है, जिनके लिए पहले बड़े स्तर पर आयात पर निर्भरता थी। अब 57 अलग-अलग मेडिकल डिवाइस का उत्पादन शुरू हो चुका है। इनमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व शामिल हैं।
योजना ने वैश्विक निर्माताओं को भारत में विनिर्माण गतिविधियां स्थापित या विस्तारित करने के लिए भी आकर्षित किया है। इसके साथ तकनीक हस्तांतरण और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक साझेदारियों पर भी काम हुआ है।
