भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत
इस पाइपलाइन में करीब 130 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें बाजार नियामक से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा लगभग 75 कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल किया है और वे नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं।
इतनी बड़ी पाइपलाइन से संकेत मिलता है कि कंपनियां सार्वजनिक बाजारों के माध्यम से पूंजी जुटाने में लगातार रुचि दिखा रही हैं। इससे भारतीय प्राइमरी मार्केट के आकार, गहराई और भविष्य में पूंजी उपलब्ध कराने की क्षमता का भी पता चलता है।
संस्थागत निवेशकों, उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भी इस बाजार के विस्तार में भूमिका निभाई है। इससे प्राइमरी मार्केट का इस्तेमाल केवल तत्काल फंड जुटाने के बजाय लंबे समय के पूंजी निर्माण के माध्यम के रूप में बढ़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। वर्ष 2016 में यह राशि 26,494 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये हो गई।
मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या में भी इसी अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2016 में देश में 26 मेनबोर्ड आईपीओ आए थे। 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई, जबकि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में आ चुके हैं।
भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेश की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। बाजार की मजबूती अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। म्यूचुअल फंड उद्योग के विस्तार के साथ सार्वजनिक इक्विटी, निजी पूंजी और ऋण बाजार के बीच भी बेहतर जुड़ाव विकसित हुआ है।
आगे की दिशा में यह महत्वपूर्ण होगा कि सार्वजनिक बाजार से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबारी विस्तार, नई उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और अन्य दीर्घकालिक उत्पादक निवेश में किस तरह किया जाता है।
SME IPO बाजार में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। वर्ष 2025 में 267 SME आईपीओ आए, जो उस वर्ष का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा रहा। वहीं 2026 में अब तक 156 SME इश्यू बाजार में आ चुके हैं।
2016 से 2026 के बीच SME कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से कुल 39,849 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसी अवधि में औसत SME इश्यू का आकार भी बढ़ा है। वर्ष 2016 में यह करीब 8 करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 45 करोड़ रुपये हो गया।
पब्लिक मार्केट गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर निवेश बैंकिंग क्षेत्र पर भी दिखाई दिया है। सितंबर 2016 में देश में 188 मर्चेंट बैंकर पंजीकृत थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 250 हो गई, जो करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट के अगले चरण में केवल आईपीओ की संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की गुणवत्ता, संस्थागत निवेशकों की भागीदारी, बेहतर खुलासे, पूंजी का व्यापक वितरण और कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को समर्थन देने की क्षमता भी बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
