फोर्स लेबर आयात प्रतिबंध का मिला फायदा, अमेरिका ने भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा, कई देशों पर अधिक शुल्क
यह निर्णय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा सेक्शन 301 के तहत की गई व्यापक जांच के बाद लिया गया है। जांच में 60 प्रमुख व्यापारिक अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अमेरिकी प्रशासन का आरोप था कि इन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने या उसके पालन को सुनिश्चित करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसी आधार पर विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग टैरिफ दरें तय की गई हैं।
यूएसटीआर के अनुसार, भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिन्हें 10 प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में रखा गया है। इस समूह में बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश भी शामिल हैं। वहीं चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू किया जाएगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान के लिए अलग व्यवस्था अपनाई गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जून में प्रस्तावित कार्रवाई सार्वजनिक किए जाने के बाद भारत ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू करने की दिशा में कदम उठाए। इसी पहल को ध्यान में रखते हुए भारत को अधिक अनुकूल श्रेणी में रखा गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जबरन श्रम को समाप्त करने और व्यापारिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस जांच प्रक्रिया के दौरान दो चरणों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया गया और दो हजार से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इसके आधार पर यूएसटीआर ने निष्कर्ष निकाला कि समीक्षा के दायरे में शामिल सभी अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों में सुधार की आवश्यकता है। इसी कारण 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
हालांकि अमेरिका ने कुछ आवश्यक उत्पादों को इस कार्रवाई से बाहर भी रखा है। इनमें दवाएं, सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, चुनिंदा कच्चा माल और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा जाना द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, हालांकि आगे इसका प्रभाव दोनों देशों के व्यापार और निर्यात पर नजर रखने के बाद ही स्पष्ट होगा।
