March 9, 2026

बैंक और वॉलेट ऐप्स में बढ़ेंगे शुल्क सेवाएं होंगी सीमित; ग्राहकों के लिए मायूस करने वाली खबर

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नई दिल्ली । बैंकिंग सेवाओं और वॉलेट ऐप्स पर शुल्क लगातार बढ़ाए जा रहे हैं जिससे ग्राहकों को नए साल में और अधिक खर्च का सामना करना पड़ेगा। ICICI बैंक पेटीएम मोबिक्विक जैसे वॉलेट ऐप्स और एयरटेल पेमेंट बैंक ने अपनी सेवाओं में बदलाव की योजना बनाई है। इनमें शुल्क वृद्धि नई सेवाओं का शुल्क लगाना और कुछ सुविधाओं को बंद करना शामिल है।

ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना

क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।

एयरटेल पेमेंट बैंक

एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।

वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि

भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।

ग्रामीण बैंकों का एकीकरण

इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।

उपभोक्ताओं के लिए चिंता

बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।

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