पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार
देश में खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार पिछले वर्ष भारत का खाद्य तेल आयात बिल लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसके बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है और इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक है।
बाजार में विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। सरसों तेल के भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल और अन्य खाद्य तेलों के दाम भी ऊपर गए हैं। कारोबारियों के अनुसार सरसों की मांग बढ़ने और मंडियों में सीमित आवक के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है। वहीं सोयाबीन की आवक में कमी आने से उससे जुड़े उत्पाद भी महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को दीर्घकालिक समाधान के रूप में तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक खेती, प्रसंस्करण क्षमता और किसानों को प्रोत्साहन देने जैसी योजनाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे खाद्य तेलों की कीमतों, शिपिंग लागत और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल और महंगे हो जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।
हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, वैश्विक आपूर्ति, मौसम और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी। यदि तिलहन की अच्छी पैदावार होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं तो खाद्य तेलों की महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।
