July 2, 2026

ओडिशा में एल्युमीनियम क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक पहल, अदाणी ग्रुप और आईएचसी का 1.08 लाख करोड़ रुपये निवेश; हजारों रोजगार और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को मिलेगा नया आधार

0
20-1782989697
नई दिल्ली । भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली एक बड़ी पहल के तहत अदाणी ग्रुप ने अबु धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) के साथ मिलकर ओडिशा में अत्याधुनिक एल्युमीनियम परियोजना स्थापित करने की घोषणा की है। करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली यह परियोजना देश के धातु उद्योग के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलों में शामिल मानी जा रही है। इसके माध्यम से भारत की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भुवनेश्वर में आयोजित समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान कंपनी की ओर से बताया गया कि यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरी एल्युमीनियम वैल्यू चेन को एकीकृत रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखेगी। इसके तहत कच्चे माल के प्रसंस्करण से लेकर तैयार उत्पादों के निर्माण तक की सभी प्रमुख गतिविधियां एक ही औद्योगिक परिसर में संचालित की जाएंगी। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।

प्रस्तावित परियोजना में प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख टन क्षमता वाली एल्युमिना रिफाइनरी स्थापित की जाएगी, जबकि करीब 20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर भी विकसित होगा। इसके अलावा लगभग 10 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क तैयार किया जाएगा, जहां विभिन्न औद्योगिक और उपभोक्ता क्षेत्रों के लिए मूल्यवर्धित एल्युमीनियम उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे देश में आयात पर निर्भरता कम होने और निर्यात क्षमता बढ़ने की संभावना है।

परियोजना के सुचारु संचालन के लिए लगभग 4,000 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही करीब 400 मेगावाट हरित ऊर्जा का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी। यह पहल उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस निवेश का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। निर्माण चरण के दौरान करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। वहीं परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद लगभग 18,500 स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त परिवहन, लॉजिस्टिक्स, लघु उद्योग, सेवा क्षेत्र और स्थानीय कारोबार से जुड़े हजारों लोगों को भी आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है।

कंपनी का मानना है कि इस परियोजना के माध्यम से केवल एक औद्योगिक संयंत्र का निर्माण नहीं होगा, बल्कि ओडिशा में व्यापक आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र विकसित होगा। इससे स्थानीय उद्यमों को नए बाजार, युवाओं को कौशल आधारित रोजगार और छोटे व्यवसायों को दीर्घकालिक अवसर प्राप्त होंगे। परियोजना के आसपास सहायक उद्योगों के विकसित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निवेश भारत के धातु उद्योग को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। एकीकृत उत्पादन मॉडल, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता और बड़े पैमाने की विनिर्माण क्षमता के कारण यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत को एल्युमीनियम क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने के क्षेत्र में ओडिशा के लिए भी एक नई पहचान बनाने का आधार बनेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *