15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण
मई महीने के मध्य के बाद उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, सूरज की तपिश और अधिक तीखी हो जाती है और वातावरण शुष्क होता जाता है। इसी समय को वृषभ संक्रांति से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस परिवर्तन के बाद गर्मी अपने अगले और अधिक तीव्र चरण में पहुंच जाती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश धरती के तापमान और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालता है। इस राशि का संबंध स्थिरता और तीव्र ऊर्जा से माना जाता है, और जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तो उसकी उष्मा का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी समय दिन लंबे होने लगते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता है।
इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी इस अवधि को और महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का संकेत माना गया है, जहां सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से प्रभावित करती हैं। ग्रामीण मान्यताओं में इस समय को ‘नौतपा’ से भी जोड़ा जाता है, जो भीषण गर्मी के चरम समय का संकेत देता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा सूर्य की ओर अधिक झुका होता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणें जमीन और वातावरण को तेजी से गर्म करती हैं और पहले से जमा गर्मी भी इसमें शामिल हो जाती है। यही कारण है कि मई के मध्य के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि देखने को मिलती है।
इस अवधि में हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण अधिक शुष्क हो जाता है, जिससे दिन के समय तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं होता और वातावरण में ठंडक का अभाव महसूस होता है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को गर्मी के लगातार जमा होने का प्रभाव मानते हैं, जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंच जाता है।
