April 23, 2026

शनि देव का परिचय, क्यों माना जाता है इन्हें न्यायप्रिय ग्रह और देवता

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नई दिल्ली। शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा की जाता है। कहा जाता है कि, जो जातक उनका व्रत करते है उनके घर पर उनकी कृपा बनी रहती है उनकी क्रोधित दृष्टि ऊपर नहीं पड़ती। शनिदेव एक ऐसे देव हैं, जो लोगों को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक ऐसे ग्रह हैं, जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जरूर आते हैं। वह साढ़ेसाती और ढैय्या के रूप में आकर लोगों को उनके फल देते हैं।

कौन हैं शनिदेव?
सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं शनिदेव। उनके भाई यमराज (मृत्यु के देवता) और बहन यमुना हैं। भगवान शिव के आशीर्वाद से शनिदेव को ग्रहों में स्थान मिला और उनको न्याय का देवता कहा गया। वे न्याय प्रिय हैं। वे लोगों के साथ हमेशा न्याय करते हैं।

शनिदेव का वर्ण काला या गहरा नीला बताया जाता है। वे काले वस्त्र धारण करते हैं और उनके हाथ में धनुष, त्रिशूल या गदा होती है। उनका वाहन कौआ (काला कौवा) है। उनका गंभीर और कठोर स्वरूप उनके न्यायप्रिय स्वभाव को दर्शाता है।

शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहते हैं?
कथा के अनुसार, शनिदेव का जन्म हुआ तो वे काले रंग के थे।सूर्यदेव ने जब शनिदेव को देखा तो खुश नहीं हुए.।उनके मन में यह शंका हुई कि उनका रंग गोरा है तो उनका पुत्र काला कैसे हो गया? इस वजह से वे शनिदेव की माता छाया के चरित्र पर शक करने लगे। इससे छाया काफी दुखी हुईं और सूर्य देव को श्राप दे दिया।

जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे ​अपने पिता पर क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या कि ताकि वे अपने पिता को माता के प्रति गलत व्यवहार के लिए दंडित कर सकें।भगवान शिव जब प्रसन्न हुए तो उन्होंने शनिदेव को नक्षत्र मंडल में स्थान देकर दंडाधिकारी बना दिया।

शिव भगवान की कृपा मिलने से शनिदेव कर्मफलदाता बन गए।उन्हें नवग्रह में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. चाहें देव हों, मनुष्य, राक्षस, गंधर्व, किन्नर, सभी को शनिदेव की दृष्टि का सामना करना पड़ता है।उनको कर्मों के अनुसार फल भुगतना पड़ता है।

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