August 1, 2026

शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ

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नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से शनि मंदिरों में जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और शनि देव की पूजा आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को कम करने में सहायक होती है। यही कारण है कि देशभर के शनि मंदिरों में शनिवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते बल्कि अच्छे कर्म करने वालों को सफलता सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं जबकि बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार दंड भी देते हैं। इसलिए शनि देव की पूजा का सबसे बड़ा संदेश यह माना जाता है कि व्यक्ति सदैव सत्य ईमानदारी और अच्छे आचरण का पालन करे।

शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार जब भगवान हनुमान ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब युद्ध के दौरान शनि देव को गंभीर चोटें आई थीं। उस समय उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें आराम मिला। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई और माना जाने लगा कि तेल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

एक अन्य मान्यता यह भी है कि सरसों का तेल नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धालु शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करते हैं दीपक जलाते हैं काले तिल उड़द और नीले या काले वस्त्र अर्पित करते हैं। इसके साथ ही शनि स्तोत्र शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करने से भी विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती ढैया या प्रतिकूल दशा चल रही हो वे शनिवार के दिन विधि विधान से शनि पूजा करें तो मानसिक तनाव आर्थिक कठिनाइयों और जीवन की बाधाओं में कमी आ सकती है। हालांकि केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों में भी सुधार करना आवश्यक बताया गया है क्योंकि शनि देव सबसे अधिक कर्म और न्याय को महत्व देते हैं।

शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना काले तिल दान करना गरीबों की सहायता करना गौ सेवा करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को शनि कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। साथ ही किसी का अपमान न करना झूठ छल कपट और अन्याय से दूर रहना भी शनि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शनि देव को तेल अर्पित करने का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं बल्कि जीवन में संयम धैर्य अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाना है। जब व्यक्ति श्रद्धा के साथ पूजा के साथ-साथ अपने आचरण को भी बेहतर बनाता है तभी शनि देव की वास्तविक कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति समृद्धि तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

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