July 30, 2026

राहु 2 अगस्त को बदलेंगे नक्षत्र, मंगल के प्रभाव से मेष समेत इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत

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नई दिल्ली। सावन माह की शुरुआत के साथ ही ग्रह-नक्षत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को राहु अपने स्वामित्व वाले शतभिषा नक्षत्र से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में राहु को अप्रत्याशित परिणाम देने वाला ग्रह माना जाता है। ऐसे में यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ राशियों के लिए करियर, धन और सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है।

धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, जो साहस, ऊर्जा और भूमि से जुड़े कार्यों के कारक माने जाते हैं। इसलिए राहु का यह गोचर कई लोगों के लिए उन्नति और आर्थिक लाभ के संकेत दे रहा है।

मेष राशि
मेष राशि के स्वामी मंगल होने से राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने लगेंगे। नया कारोबार या नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। विदेश यात्रा, विदेशी व्यापार या दूरस्थ क्षेत्रों से जुड़े कार्यों में लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की भी संभावना है।

तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए यह समय संपत्ति और निवेश के लिहाज से लाभकारी माना जा रहा है। जमीन, मकान या वाहन खरीदने की योजना साकार हो सकती है। पुराने निवेश से अच्छा लाभ मिलने के योग हैं। प्रतियोगी परिस्थितियों में सफलता मिलने और विरोधियों पर बढ़त बनाने के संकेत भी हैं।

कुंभ राशि
धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध कुंभ राशि से भी माना जाता है। ऐसे में राहु का यह परिवर्तन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। करियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। टेक्नोलॉजी, रिसर्च और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है। लंबे समय से अटका धन मिलने की संभावना भी बन सकती है।

राहु के शुभ प्रभाव के लिए करें ये उपाय
– शनिवार के दिन पक्षियों को बाजरा या सप्तधान्य खिलाएं।
– नियमित रूप से ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र की एक माला का जाप करें।
– भगवान शिव का जलाभिषेक करें और शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें।

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