April 23, 2026

माता लक्ष्मी को क्यों कहते हैं धन की देवी? जानिए इसकी पौराणिक कथा!

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नई दिल्ली।  हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी या देवता की पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) को धन की देवी (Goddess of Wealth) क्यों माना गया है। और क्यों उनके लिए शुक्रवार का दिन समर्पित किया गया। तो चलिए आज माता लक्ष्मी से जुड़ी सारी जानकारी जानते है।

माता लक्ष्मी की मान्यता
माता लक्ष्मी हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं और उन्हें धन, वैभव, समृद्धि तथा सौभाग्य की देवी माना जाता है। वे भगवान विष्णु की पत्नी हैं और सृष्टि के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माता लक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक बताया गया है—वे कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं, उनके चार हाथ होते हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक हैं।

मां लक्ष्मी की उत्पत्ति की कथा
विष्णु पुराण के अनुसार एक बार एक बार ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को फूलों की माला प्रसन्न होकर दी, लेकिन इंद्र ने उस माला को अपने ऐरावत हाथी के सिर पर रख दिया, जिसे हाथी ने पृथ्वी लोक में फेंक दिया।इससे दुर्वासा ऋषि बहुत नाराज हुए। उन्होंने इंद्र को श्राप दे दिया कि जिस धन समृद्धि के बल पर तुमने मेरी इस भेंट का अनादर किया है, आज से तुम उस लक्ष्मी से विहीन हो जाओगे। तुम्हारा स्वर्ग लोक ही नहीं ये तीनों लोक श्रीहीन हो जाएंगे।

इसके बाद तीनों लोकों में हलचल मच गई। ऐसे में इंद्र भगवान विष्णु के पास इस परेशानी का हल पूछने गए. तब श्री विष्णु ने कहा कि समुद्र मंथन के जरिए भी ‘श्री’ को फिर से प्राप्त किया जा सकता है।श्री हरि के सलाहनुसार देवताओं ने दानवों के साथ मिलकर क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया। समुद्र मंथन से 14 रत्न समेत अमृत और विष की प्राप्ति हुई।इसी दौरान माता लक्ष्मी की भी उत्पत्ति हुई। माता लक्ष्मी को श्रीहरि ने अपनी अर्धांग्नी रूप में धारण किया।

इस प्रकार कहने लगे माता को सुख समृद्धि की देवी
लक्ष्मी के उत्पन्न होने के साथ ही तीनों लोकों में सुख समृद्धि वापस लौट आयी।देवताओं ने अमृत पान किया, अमर हो गए। उन्होंने दानवों के आतंक से मुक्ति पा ली। तब से माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी कहा जाने लगा।

पूजा विधि
माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली और कोजागरी पूर्णिमा के दिन की जाती है। पूजा करने के लिए सबसे पहले घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी को स्थापित करें। दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। माता को कमल का फूल, चावल, हल्दी, कुमकुम और मिठाई चढ़ाएं। “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें और लक्ष्मी आरती गाएं। पूजा के अंत में प्रसाद बांटें और सभी से आशीर्वाद लें।इस प्रकार श्रद्धा और नियम से की गई माता लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

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