March 8, 2026

Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू होलाष्टक, 8 दिनों तक वर्जित होंगे विवाह और मांगलिक कार्य

0
22-15-1771754719

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक का काल शुरू हो रहा है। यह अवधि होली पर्व से आठ दिन पूर्व की मानी जाती है और 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा तक चलेगी। इस समय विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। ज्योतिषाचारियों के अनुसार इस आठ दिन के दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए इस समय शुभ कार्यों में सफलता नहीं मिलती।

होलाष्टक के दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे प्रमुख ग्रह उग्र माने जाते हैं। इनके प्रभाव के कारण मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं। हालांकि यह समय आत्मशुद्धि, संयम, जप-तप और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस अवधि में धार्मिक क्रियाओं, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, सभी पंचांगों में होलाष्टक का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते। होलिका दहन के बाद वातावरण शुद्ध हो जाता है और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक विश्वास के साथ निभाया जाता है।

इस वर्ष होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के अनुसार 3 मार्च 2026 को भोग 04:57 बजे किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 शाम 05:18 से 3 मार्च 2026 शाम 04:33 तक रहेगी। होलिका दहन के लिए लगभग 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा। इसके बाद 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। होलाष्टक के आठ दिनों में कार्यों में बाधा और ग्रहों के उग्र प्रभाव के कारण मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय संयम और तपस्या को अपनाना चाहिए। इस दौरान घर की सफाई, पूजा, जप, ध्यान और दान-पुण्य के कार्य करने से परिवार में शांति और सौभाग्य आता है। इस काल में शुभ कार्यों को रोकना और साधना में समय देना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का माध्यम माना जाता है।

इसलिए 24 फरवरी से 3 मार्च तक के होलाष्टक काल में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य टालकर ध्यान, पूजा और आत्मशुद्धि पर ध्यान दें। होलाष्टक समाप्त होने के बाद ही मांगलिक कार्य करने से सफलता और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *