August 25, 2026

रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का साया, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक लगेगा या नहीं और क्या होगा असर

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नई दिल्ली । 28 अगस्त 2026 का दिन खगोलीय और धार्मिक दोनों लिहाज से खास रहने वाला है। इस दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और संयोग से इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा और क्या इसका असर राखी के त्योहार पर पड़ेगा। खगोलीय गणनाओं के मुताबिक 28 अगस्त को लगने वाला ग्रहण गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान चंद्रमा का करीब 96 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा।

भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण सुबह करीब 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। ग्रहण अपने चरम पर सुबह करीब 9 बजकर 43 मिनट पर होगा। हालांकि भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि ग्रहण के दौरान यहां दिन का समय रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। इसी वजह से भारत के किसी भी हिस्से से इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।

यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के लिहाज से भी स्थिति अलग रहेगी। परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई देता है वहीं उससे जुड़े सूतक काल को मान्यता दी जाती है। ऐसे में भारत में 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण के कारण किसी तरह की विशेष रोक नहीं रहेगी और लोग सामान्य तरीके से भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगे।

दिल्ली में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है। खास बात यह भी है कि भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को चंद्र ग्रहण के कारण रक्षाबंधन की पूजा या राखी बांधने को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

दुनिया के कई हिस्सों में यह खगोलीय घटना जरूर दिखाई देगी। अमेरिका के अलावा यूरोप और अफ्रीका के कई क्षेत्रों से चंद्र ग्रहण को देखा जा सकेगा। इन जगहों पर रहने वाले भारतीय अपनी स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा रही है। भगवान शिव की आराधना करने वाले लोग इस दौरान ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, पूजा स्थल की सफाई और जरूरतमंदों को अन्न या आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी कई परिवारों में मानी जाती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। इसलिए कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोगों को इस अवधि में थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव कैसा होगा इसे लेकर निश्चित निष्कर्ष केवल राशि देखकर नहीं निकाला जा सकता। ज्योतिष में इसके लिए पूरी जन्मकुंडली का विश्लेषण जरूरी माना जाता है।

कुल मिलाकर 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद खास घटना है। भारत में भले ही यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा लेकिन रक्षाबंधन के दिन पड़ने के कारण इसकी चर्चा जरूर बनी हुई है। भारत में रहने वाले लोग बिना किसी चिंता के रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं क्योंकि यहां इस ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होगा।

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