जैसलमेर में पहली बार चादर महोत्सव: महामरी से बचाने वाले जैन-संत की 872 साल पुरानी चादर के दर्शन, 74 लाख की बोली
वस्त्रों का विशेष अभिषेक मानसरोवर के पवित्र जल से किया गया। अभिषेक और पूजा के लिए बोली लगाई गई जिसमें फलोदी के रहने वाले रविंद्र कुमार ने 74 लाख रुपये की बोली लगाई। पूजा के लिए भी क्रमशः 21 लाख और 11 लाख की दो बोली लगी।
महोत्सव के दौरान जैसलमेर के प्रसिद्ध सोना किले से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा गढ़ीसर होते हुए देदांसर ग्राउंड पहुंची। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने वरघोड़ा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान ड्रोन से फूलों की बारिश की गई। सोनार किले से विंटेज कार में चादर को महोत्सव स्थल तक ले जाया गया जहां पानी के जहाज जैसी रथ में चादर को दर्शन के लिए रखा गया।महोत्सव स्थल पर परंपरानुसार चादर का विधिवत अभिषेक किया जाएगा।
जैन समाज के इतिहास में यह पहला अवसर है जब चादर महोत्सव का आयोजन किया गया है। इस महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालु न केवल जैन धर्म के ऐतिहासिक प्रतीकों को देख सकते हैं बल्कि उनकी पूजा अर्चना और अभिषेक में भाग लेकर धार्मिक पुण्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
