Maha Shivratri: 300 साल बाद 8 शुभ संयोग, चार पहर में कब और कैसे करें पूजा
– भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

Maha Shivratri 2026: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महापर्व शिवरात्रि जो हिंदू परंपरा का एक बहुत महत्व का पर्व है। इस बार महाश्विरात्रि 15 फरवरी वार रविवार को शाम पांच बजकर चार मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 16 फरवरी वार सोमवार पांच बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि शिवरात्रि की पूजा निशिथ काल में ही की जाती है इसलिए 15 फरवरी को ही शिवरात्रि मनायी जाएगी।
300 साल बाद : महाशिवरात्रि पर आठ शुभ संयोग
इस बार महाशिवरात्रि का पर्व विशेष इसलिए भी है क्योंकि इस दिन सूर्य बुध और शुक्र त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं, पंडितों व ज्योतिषों के अनुसार इसे बड़ा ही दुर्लभ संयोग माना जाता है 300 साल बाद महाशिवरात्रि इस बार आठ शुभ संयोग लेकर आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव जी का शिवलिंग के रूप में प्राकट्य हुआ था, बारह ज्योर्तिलिंग का प्राकट्य उत्सव का दिन है महाशिवरात्रि।
इसके साथ ही शिव पार्वती के विवाह का दिन भी शिवरात्रि को ही माना जाता है, इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा उपासना से जीवन में सुख प्राप्त होता है, इस दिन मनुष्य को व्रत उपवास मंत्र जाप और रात्रि में जागरण करना चाहिए, सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर शिव पूजा का संकल्प लें, भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें।
साथ ही भगवान शिव को भी जल अर्पित करें, पंचोपचार पूजन करें और भगवान शंकर के मंत्रों का जाप करें। शिवरात्रि पर रात्रि में रुद्राष्टक या शिव स्तुति का पाठ अवश्य करें।
क्यों करें चार पहर की पूजा
इस दिन चार पहर की पूजा करने का विशेष महत्व रहता है अगर ऐसा कर सकें तो पहले पहर में दूध, दूसरे पहर में दहीं, तीसरे पहर में घी और चौथे पहर में शहद से पूजन करना विशेष फलदाई रहता है और इन सब के साथ हर पहर में जल का भी प्रयोग करें।
महाशिवरात्रि की पूजा चार पहर की होती है, तो जानते हैं चार पहर की पूजन का मुहूर्त- प्रथम पहर पूजा 15 फरवरी शाम 6:11 से रात 9:22 तक, दूसरे पहर की पूजा 15 फरवरी को रात 9:23 से16 फरवरी रात 12:34 तक तृतीय पहर पूजा 16 फरवरी को रात 12:35 से सुबह 3:46 मिनट तक और चतुर्थ पहर पूजा 16 फरवरी को सुबह 3:46 मिनट से सुबह 6.59 मिनट तक कर सकते हैं।
निशिथ काल की पूजा का मुहूर्त 16 फरवरी रात 12.09 मिनट से 01 बजकर 01 मिनट तक रहेगा,जो लोग शिवरात्रि का व्रत रखते हैं उनके लिए व्रत पारण 16 फरवरी को सुबह 6:33 मिनट से दोपहर 3.10 तक रहेगा।
जरूरी साम्रगी
महाशिवरात्रि की पूजन में क्या सामग्री रखें, ये भी जानना नितांत जरूरी है। गन्ने का रस, कच्चा दूध, शुद्ध घी, बेलपत्र, भांग, धतूरा, जायफल, कमलगट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र, शहद, बेर आदि चीजों को शिवलिंग पर अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें शिव आरती गाएं।
विशेष बात जो शिव पूजा से जुड़ी हुई है वो है इस बात का ध्यान जरूर रखें–शिवलिंग पर तुलसी दल या तुलसी का पत्ता ना चढ़ाएं, केतकी और चंपा के फूल भी ना चढ़ाएं, शिवजी को टूटे चावल भी अर्पित ना करें, शिवलिंग पर नारियल भी हमेशा पूरा ही चढ़ाना चाहिए, शिवलिंग पर कुमकुम सिंदूर कभी नहीं चढ़ाना चाहिए।
शिवरात्रि का व्रत अगर आपने रखा है तो फलाहार ही करें इस दिन अन्न या किसी भी प्रकार का अनाज ग्रहण नहीं किया जाता है।
किस उपाय से क्या फल प्राप्त होगा
मान्यता के अनुसार धन प्राप्ति के लिए शिवरात्रि के दिन दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से भगवान महादेव का जलाभिषेक करें, फिर जल की धारा शिवलिंग पर चढ़ाएं और धन प्राप्ति के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करें। संतान प्राप्ति के लिए शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर घी अर्पित करें फिर जल की धारा अर्पित करें और संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें, संतान प्राप्ति की पूजा पति-पत्नी दोनों मिलकर करें।
किसी का विवाह नहीं हो रहा है तो उसके लिए शिवरात्रि के दिन यह उपाय जरूर करें कि शिवलिंग पर 108 बेलपत्र अर्पित करें स्वयं के विवाह के लिए अगर भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए बेलपत्र अर्पित कर रहे हैं तो नमः शिवाय का जाप करें, और अगर दूसरे के विवाह के लिए बेलपत्र अर्पित करें तो ओम नमः शिवाय का जाप करें। अगर वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी हो तो शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर को पीला वस्त्र अर्पित करें, फिर इसे संभाल कर रखलें।
अगर आप रोजगार की तलाश में है या कोई व्यापार शुरू करना चाहतें हैं तो शिवलिंग पर जलाभिषेक करें, जल की धारा धैर्य के साथ अर्पित करें। शिव मंदिर में शाम के समय ग्यारह घी के दीपक जलाए। अगर आपको स्वास्थ्य की परेशानी है तो शिवलिंग पर गुलाब या चंदन का इत्र अर्पित करें, उसके बाद जल अर्पित करें। फिर ग्यारह माला इस मंत्र का जाप करें— ‘ऊं जूं स: माम पालय पालय।।
महाशिवरात्रि पर उपवास अवश्य करें और अगर ना कर पाए तो फलाहार करें। पूरे दिन शिव मंत्रों का जाप करें। रात में जागरण करें। इस दिन पूरा ब्रह्मांड शिवमय होता है, इस दिन की गई पूजा उपासना से आप शिव को कर प्राप्त कर सकते है यानी शक्ति, भक्ति,साधना,संतुलन, ऐश्वर्या, वैराग्य और तन मन धन की शांति और यही है शिवमय हो जाना।
