April 23, 2026

22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय

0
24-1776769923

नई दिल्ली:
धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 22 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जा रहा है यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं

पंचांग के अनुसार यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है जो रात 10 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर निर्धारित है वहीं आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का आरंभ होगा

इस दिन का सबसे खास पहलू रवि योग का निर्माण है जो सुबह 5 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा ज्योतिष के अनुसार यह योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए उपयुक्त माना जाता है इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ समय माना जाता है

दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी जो सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा यह समय पूजा और ध्यान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है वहीं शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना जाता है

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है इसके अलावा यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगा दुर्मुहूर्त का समय दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जिसे अशुभ माना जाता है

इसके साथ ही वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा इस दौरान भी शुभ कार्यों से परहेज करना उचित माना जाता है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही मुहूर्त का चयन जीवन में सकारात्मक परिणाम लाने में सहायक होता है

 22 अप्रैल का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है जहां एक ओर स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा का विशेष महत्व है वहीं दूसरी ओर शुभ योगों का संयोग इसे और भी खास बनाता है ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की योजना बनाएं ताकि उन्हें बेहतर फल प्राप्त हो सके

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *