भारत में वेयरहाउसिंग लीजिंग 12% बढ़ी, तीसरी तिमाही में 1.91 करोड़ वर्ग फुट जगह हुई लीज
इससे पहले अप्रैल से जून की दूसरी तिमाही में वेयरहाउसिंग गतिविधियों में अपेक्षाकृत सुस्ती देखी गई थी। हालांकि, तीसरी तिमाही में बाजार ने फिर रफ्तार पकड़ ली। विनिर्माण गतिविधियों में तेजी, लॉजिस्टिक्स सेवाओं को आउटसोर्स करने का बढ़ता चलन और त्योहारी सीजन से पहले सामान का भंडार तैयार करने की रणनीति इस वृद्धि के प्रमुख कारण रहे। कंपनियों ने आगामी मांग को ध्यान में रखते हुए अपने गोदामों और वितरण नेटवर्क का विस्तार किया।
क्षेत्र में यह तेजी ऐसे समय दर्ज की गई, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी हुई थीं। इसके साथ ही तेल और माल ढुलाई की लागत भी ऊंचे स्तर पर थी। इन चुनौतियों के बावजूद वेयरहाउसिंग स्पेस की मांग में मजबूती बनी रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां बदलती कारोबारी परिस्थितियों के बीच अपनी भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला को व्यवस्थित करने पर ध्यान दे रही हैं।
तीसरी तिमाही में कुल वेयरहाउसिंग मांग में विनिर्माण कंपनियों और 3पीएल ऑपरेटरों की संयुक्त हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही। विनिर्माण क्षेत्र में वेयरहाउसिंग लीजिंग सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़ी। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और इलेक्ट्रिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों की ओर से जगह की मांग बढ़ने से इस क्षेत्र को समर्थन मिला।
थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने भी वेयरहाउसिंग बाजार के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई। इन कंपनियों की ओर से लीज पर ली गई जगह में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कारोबारी लागत में उतार-चढ़ाव और परिचालन को अधिक लचीला बनाने की जरूरत के कारण कई कंपनियां अपने भंडारण और वितरण संबंधी काम विशेष लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं को सौंप रही हैं। इससे 3पीएल ऑपरेटरों के लिए वेयरहाउसिंग स्पेस की मांग बढ़ रही है।
त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ता केंद्रित कंपनियों ने भी अपने भंडारण नेटवर्क को मजबूत किया। ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से वेयरहाउसिंग स्पेस की लीजिंग में सालाना पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, तेजी से बढ़ती मांग के बीच एफएमसीजी यानी दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों ने लीजिंग में 101 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। एफएमसीडी यानी उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्र में यह वृद्धि 43 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां पहले से ही भंडारण और वितरण की तैयारियां कर रही हैं।
इस वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि घरेलू विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार और विशेष लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं की बढ़ती भूमिका भारत के वेयरहाउसिंग बाजार को नया स्वरूप दे रही है। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र के विकास का अगला चरण केवल लीज पर ली जाने वाली जगह की मात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। विनिर्माण और उपभोग केंद्रों के नजदीक गुणवत्तापूर्ण वेयरहाउसिंग सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।
बैजल ने यह भी कहा कि मजबूत वेयरहाउसिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता, समय पर सरकारी मंजूरियां और आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश जरूरी है। भारत की बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करना होगा, जहां भंडारण सुविधाएं कारोबार की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। कुल मिलाकर, तीसरी तिमाही के आंकड़े देश में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बढ़ती कारोबारी मांग को दर्शाते हैं।
