उज्जैन एडीएम कार्यालय में लोकायुक्त का छापा, उज्ज्वला कनेक्शन की फाइल आगे बढ़ाने के बदले क्लर्क ने मांगी थी 50 हजार की रिश्वत
इस कार्रवाई में एक खास बात सामने आई। आरोपी ने रिश्वत की रकम सीधे अपने हाथ में लेने के बजाय शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये कार्यालय की दराज में रखवा दिए थे। हालांकि, लोकायुक्त की टीम पहले से मौके पर मौजूद थी। जैसे ही रकम दराज में रखी गई, टीम ने कार्रवाई करते हुए क्लर्क को पकड़ लिया। इसके बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया।
मामला नागदा के बिरलाग्राम निवासी बृजेश विश्वकर्मा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी माता के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति को जारी कर दिया गया था। परिवार को इस कनेक्शन की जानकारी नहीं थी, जबकि उन्हें स्वयं गैस कनेक्शन की आवश्यकता थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनकी माता के नाम पर जारी कनेक्शन से 14 सिलेंडर की डिलीवरी भी हो चुकी थी।
इस मामले को लेकर बृजेश विश्वकर्मा ने पहले कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद खाद्य विभाग ने मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट एडीएम कार्यालय को भेज दी। अब इस शिकायत पर आगे की कार्रवाई और फाइल के निराकरण का निर्णय एडीएम कार्यालय से होना था।
इसी सिलसिले में शिकायतकर्ता ने कार्यालय में पदस्थ क्लर्क रोहित गोठवाल से संपर्क किया। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने और मामले में उचित कार्रवाई कराने के नाम पर क्लर्क ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की। लगातार रिश्वत की मांग से परेशान होकर बृजेश विश्वकर्मा ने 29 अक्टूबर 2026 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के सामने शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया। जांच में रिश्वत मांगने से संबंधित शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई की योजना बनाई गई। इसके लिए एक विशेष ट्रैप दल का गठन किया गया। टीम ने शिकायतकर्ता को तय योजना के अनुसार रिश्वत की रकम लेकर कार्यालय पहुंचने के लिए कहा।
5 नवंबर को लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता ने आरोपी की मांग के अनुसार 20 हजार रुपये दिए। क्लर्क ने यह रकम अपने हाथों में लेने के बजाय कार्यालय की दराज में रखवा दी। इसके तुरंत बाद लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया। मौके पर रिश्वत की रकम भी बरामद की गई।
लोकायुक्त निरीक्षक दीपक सेजवार के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अपनी माता के नाम पर जारी उज्ज्वला कनेक्शन और उससे हुई सिलेंडर डिलीवरी के संबंध में खाद्य विभाग में शिकायत की थी। जांच रिपोर्ट एडीएम कार्यालय पहुंचने के बाद क्लर्क ने फाइल पर कार्रवाई के लिए रिश्वत मांगी थी।
फिलहाल आरोपी रोहित गोठवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। लोकायुक्त पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल करेगी कि शिकायत से संबंधित प्रक्रिया में रिश्वत मांगने और फाइल के निस्तारण को लेकर क्या परिस्थितियां थीं।
