28 मुकदमों और ED की गिरफ्तारी से परेशान आजम खान की सुप्रीम कोर्ट में भावुक अपील, हाईकोर्ट पहुंचा मामला..
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी को चुनौती देने और इस मामले में राहत देने पर विचार करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट उचित मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को दो दिनों के भीतर पूरी याचिका उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि वह ईडी मामले में दाखिल आजम खान की जमानत याचिका पर 16 नवंबर को ही अंतरिम आदेश पारित करने पर विचार करे। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अपनी ओर से कोई अंतरिम राहत नहीं दी।
अदालत में आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आजम खान की उम्र करीब 80 वर्ष है और उनके खिलाफ 28 मुकदमे दर्ज हैं। सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल सभी मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। उन्होंने अदालत के सामने चिंता जताई कि एक मामले में राहत मिलने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तारी का सिलसिला जारी रहा तो आजम खान जेल में ही अपनी जिंदगी समाप्त कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई के आधार और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जिस मूल मामले का संबंध वर्ष 2006 से है, उसमें पहली प्राथमिकी वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने सवाल किया कि इस मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के प्रावधान किस आधार पर लागू किए गए।
सिब्बल ने शिकायतों में लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ मामलों में घर में घुसकर पांच हजार रुपये और एक तोला सोने की बालियां लूटने, मकान को बुलडोजर से गिराने तथा चार बकरियां चोरी करने जैसे आरोप शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बकरी और गाय भी अपराध से अर्जित आय का आधार बन सकती हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि बचाव पक्ष की दलील में दम हो सकता है, लेकिन इस स्तर पर सुप्रीम कोर्ट कोई अंतिम राय नहीं देना चाहता।
इस मामले में गिरफ्तारी की घटनाओं का क्रम भी महत्वपूर्ण है। 29 अक्टूबर को आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में मिली सजा निलंबित कर दी गई थी। इसके बाद आजम खान के जेल से बाहर आने के दौरान ईडी ने उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए एक नवंबर को विशेष अदालत की ओर से न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश पर भी सवाल उठाए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि आजम खान को लगातार जेल में रखने के लिए अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की जा रही है। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें जेल में रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। हालांकि, ये आरोप बचाव पक्ष की ओर से अदालत में रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब आजम खान की जमानत और गिरफ्तारी को चुनौती देने से जुड़ी कानूनी लड़ाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी। 16 नवंबर को प्रस्तावित सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी, जहां उनकी अंतरिम राहत की मांग पर विचार किया जा सकता है।
