दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, दो की मौत, 15 लोगों के दबे होने की आशंका.
अधिकारियों के मुताबिक, घटना सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के नजदीक गली सत्तारा में हुई। इमारत के गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली पुलिस और नगर निगम (एमसीडी) की टीमें भी बचाव अभियान में शामिल हो गईं। राहत दल मलबे को हटाकर उसके नीचे फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
बचाव दल ने अब तक तीन लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीसरे व्यक्ति का उपचार किया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग मौजूद हो सकते हैं। इसी वजह से तलाशी अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है। घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्र को सील कर दिया गया है।
हादसे के बाद बचाव कार्य में एक बड़ी चुनौती इमारत तक पहुंचने का संकरा रास्ता भी है। गली की चौड़ाई कम होने के कारण राहत दल और उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है। इसके बावजूद दमकलकर्मी और एनडीआरएफ के जवान लगातार मलबा हटाने तथा संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद नईम के अनुसार, इमारत में पिछले तीन से चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। उनके मुताबिक, भवन में तीन से चार लिंटर डाले जा चुके थे। घटना के दौरान ये सभी एक साथ गिर गए। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हादसे के समय इमारत में करीब तीन से चार लोग मौजूद थे। उन्होंने मलबे से एक शव को बाहर निकाले जाते हुए भी देखा। हालांकि, मलबे में दबे लोगों की वास्तविक संख्या का पता बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही चल सकेगा।
इस घटना को लेकर दिल्ली की राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार और एमसीडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इमारतों की सुरक्षा जांच और ऑडिट के आदेश दिए जाने के बावजूद राजधानी में भवन गिरने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
भारद्वाज ने सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई में भेदभाव किया जाता है। उनका दावा है कि रिश्वत नहीं देने वाले लोगों की इमारतों को सील कर दिया जाता है, जबकि अन्य मामलों में कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दमकल विभाग और एसडीएम कार्यालयों में भी कथित वसूली का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने ग्रेटर कैलाश-2 में दो जिम को सील किए जाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। ये सभी आरोप राजनीतिक नेता की ओर से लगाए गए हैं।
दिल्ली में इस साल इमारतें ढहने की यह छठी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले पांच बड़े हादसों में कुल 21 लोगों की जान जा चुकी है। 30 मई को सैदुलाजाब के वेस्टर्न मार्ग पर चार मंजिला व्यावसायिक इमारत गिर गई थी। भवन में कोचिंग सेंटर, कैफे और कार्यालय संचालित हो रहे थे। मलबा पास की कैंटीन पर भी गिरा था, जहां छात्र मौजूद थे। इस हादसे में छह लोगों की मौत और 13 लोग घायल हुए थे।
8 जुलाई को रोहिणी सेक्टर-16 में बारिश के दौरान दो निर्माणाधीन इमारतें ढह गई थीं। इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। 21 अगस्त को करोल बाग के रेगरपुरा इलाके में प्यारे लाल रोड पर एक इमारत का हिस्सा गिरा था। वहां तोड़फोड़ का काम चल रहा था। हादसे में एक मजदूर की मौत हुई और दो लोग घायल हुए थे।
6 सितंबर को सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। वहां लड़कों का पीजी संचालित था और हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इस घटना में सात लोगों की मौत हुई और पांच घायल हुए थे। इसके बाद 7 अक्टूबर को सीमापुरी में चार मंजिला इमारत का अगला हिस्सा गिर गया था। मलबे की चपेट में आसपास के लोग भी आए थे। बचाव दल ने 11 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें चार की मौत हुई और आठ घायल हुए थे।
चांदनी चौक की ताजा घटना ने राजधानी में निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन का ध्यान मलबे में फंसे लोगों को निकालने और हताहतों की सही संख्या का पता लगाने पर है।
