भारत-पोलैंड व्यापार को नई रफ्तार, 2030 तक तीन गुना कारोबार का लक्ष्य; एफटीए से खुलेंगे निवेश के बड़े रास्ते
पोलैंड के प्रधानमंत्री की हालिया भारत यात्रा को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान नई दिल्ली और बेंगलुरु में दो बड़े बिजनेस फोरम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में दोनों देशों की कंपनियों ने व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। राजदूत के अनुसार, दोनों बिजनेस फोरम भारत और पोलैंड के संबंधों के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े आयोजन रहे।
इन बैठकों में 100 से अधिक पोलिश कंपनियों ने हिस्सा लिया, जबकि करीब 200 भारतीय कंपनियां भी कारोबारी चर्चाओं में शामिल हुईं। इस दौरान कुल 13 अनुबंधों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और लेटर ऑफ इंटरेस्ट (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच व्यावसायिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंचने की उम्मीद है। राजदूत स्वितल्स्की ने विश्वास जताया कि दिसंबर 2026 की शुरुआत में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसके बाद अगले वर्ष की शुरुआत में इसे लागू किए जाने की संभावना है। एफटीए लागू होने से दोनों देशों की कंपनियों को व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
निवेश के मामले में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। राजदूत ने बताया कि पोलैंड में भारतीय कंपनियों का निवेश पहले से ही उल्लेखनीय है, लेकिन भारत में पोलिश निवेश अभी अपनी संभावित क्षमता से कम है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को पोलैंड में निवेश करने और वहां अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उनके मुताबिक, पोलैंड भारतीय उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजारों में प्रवेश करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। वहां मौजूद व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाकर भारतीय कंपनियां यूरोप में अपनी उपस्थिति बढ़ा सकती हैं।
रक्षा क्षेत्र में भी भारत और पोलैंड के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के नेताओं ने इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। इसके अलावा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की हालिया वारसॉ यात्रा से भी नए कारोबारी समझौतों और अनुबंधों की संभावनाएं बनी हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के औद्योगिक और व्यापारिक संबंधों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। पोलिश कंपनियां भारत में अपने साझेदारों के साथ सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं पर काम करने में रुचि दिखा रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा के इन क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी सहयोग से दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं।
राजदूत ने कहा कि पोलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने की लगातार वकालत की है। दोनों देशों के बीच बढ़ती कारोबारी भागीदारी, निवेश की संभावनाएं और ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्र में सहयोग इस साझेदारी के प्रमुख आधार बन सकते हैं। हालांकि, 2030 तक व्यापार को तीन गुना करने का लक्ष्य समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रस्तावित परियोजनाओं को वास्तविक कारोबार में बदलने पर निर्भर करेगा।
