November 2, 2026

शिवपुरी में भैंसों को बचाने के लिए ट्रेन के सामने पहुंचे पशुपालक, पांच भैंसों के साथ गई जान…

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मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में शनिवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसे में पशुपालक पहलवान सिंह यादव और उनकी पांच भैंसों की मौत हो गई। बताया गया कि वह रोज की तरह जंगल से भैंसों को चराकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुल्हाड़ी गांव के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय अचानक बीना की ओर से बीना पैसेंजर ट्रेन आ गई। ट्रैक पर कुछ भैंसें मौजूद थीं। उन्हें बचाने की कोशिश में पहलवान सिंह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौके पर ही गंभीर स्थिति हो गई। बाद में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, पहलवान सिंह यादव कुल्हाड़ी गांव के निवासी थे। शनिवार शाम करीब छह से सात बजे के बीच वह जंगल से अपनी भैंसों को लेकर वापस लौट रहे थे। गांव के पास रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस समय कुछ भैंसें रेलवे ट्रैक पर थीं। पहलवान सिंह के पास खुद को सुरक्षित निकालने का अवसर था, लेकिन उन्होंने भैंसों को बचाने के लिए उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की। इसी दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन की टक्कर से पांच भैंसों की भी मौत हो गई, जबकि चार अन्य भैंसें घायल बताई जा रही हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। घायल अवस्था में पहलवान सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। पहलवान सिंह परिवार के मुखिया थे और घर की आजीविका की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

परिवार की आय का मुख्य साधन भैंसों से मिलने वाला दूध था। बताया गया कि उनके पास कुल नौ भैंसें थीं। इनमें से पांच की हादसे में मौत हो गई, जबकि बाकी चार घायल हैं। पांच भैंसों की मौत से परिवार को करीब पांच से छह लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। पशुओं पर निर्भर परिवार के लिए यह नुकसान काफी बड़ा है। एक ओर परिवार ने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, वहीं दूसरी ओर आय का प्रमुख साधन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

घटना के बाद ग्रामीणों में रेलवे ट्रैक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि कुल्हाड़ी गांव के पास रेलवे लाइन खुले क्षेत्र से गुजरती है। यहां न तो फेंसिंग की व्यवस्था है और न ही बाउंड्रीवाल बनाई गई है। इसके अलावा रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अंडरपास भी मौजूद नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह रास्ता आसपास के किसानों और पशुपालकों के रोजमर्रा के आवागमन में इस्तेमाल होता है। ऐसे में उन्हें अपने पशुओं के साथ इसी रास्ते से रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शाम के समय ट्रेन आने का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, कई बार ट्रेन का हॉर्न भी सुनाई नहीं देता। इस स्थान पर सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग पहले भी उठाई जा चुकी है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक जरूरी व्यवस्था नहीं की गई। हादसे के बाद गांव में शोक के साथ रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी भी है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों और घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। इस घटना ने रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और पशुपालकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल फिर सामने ला दिए हैं।

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