November 1, 2026

वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

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नई दिल्ली । दुनिया की प्राचीन दार्शनिक और सभ्यतागत परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 से 4 नवंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय ‘अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विचारक, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और ज्ञान परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे। कार्यक्रम में अदाणी फाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी भी शामिल होंगी और अपने विचार रखेंगी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिक दृष्टिकोण को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

इस सम्मेलन में प्राचीन दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि नई तकनीक विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को किस तरह आसान बना सकती है। इसके साथ ही ज्ञान की अलग-अलग परंपराओं के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए वाराणसी को चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले नगरों में शामिल है। सदियों से वाराणसी शिक्षा, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन ज्ञान परंपराओं का ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में विभिन्न सभ्यताओं के विचारों पर चर्चा के लिए इस शहर को उपयुक्त स्थान माना गया है।

संगोष्ठी का आधार यह विचार है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उनका समाधान केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से संभव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और तेजी से बदलती तकनीक जैसी चुनौतियों के बीच नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार नेतृत्व और सांस्कृतिक समझ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन विषयों को दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान यूनानी दार्शनिक अरस्तू और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों के साथ हिंदू, बौद्ध, जैन, कैथोलिक और इस्लामी परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं में मौजूद समानताओं और उनके बीच के अंतर पर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। विशेष रूप से सद्गुण आधारित नैतिकता, सुशासन और सत्ता तथा शक्ति के उचित एवं नैतिक इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

आयोजन के मुख्य सत्र 2 और 3 नवंबर को होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, विषय आधारित चर्चाएं और तुलनात्मक दर्शन से जुड़े संवाद आयोजित किए जाएंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था और शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार रखे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, खासकर एआई आधारित भाषा और संवाद उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान और विचारों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

सम्मेलन का अंतिम दिन यानी 4 नवंबर सांस्कृतिक भ्रमण और ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रतिभागी गंगा घाटों का भ्रमण करेंगे और गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल सारनाथ की यात्रा भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

इस तरह तीन दिवसीय संगोष्ठी में एक ओर प्राचीन दार्शनिक विचारों और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में उनकी प्रासंगिकता समझने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।

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