अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर
नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होते भाव ने कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। चांदी करीब 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि सोने की कीमतों में भी पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीनेभर के आंकड़ों के अनुसार चांदी लगभग 40 हजार रुपये और सोना आठ हजार रुपये से अधिक सस्ता हो गया है।
चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार में सबसे ज्यादा असर दिखाया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा सौदों में शुक्रवार को 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भाव 1.80 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 1,79,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर चांदी का कारोबार पिछली बार दिसंबर 2025 में देखने को मिला था।
महीने के शुरुआती और अंतिम कारोबारी दिनों की तुलना करें तो चांदी में बड़ी गिरावट सामने आती है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर को चांदी की कीमत 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं 30 अक्टूबर को इसका भाव घटकर 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह एक महीने में चांदी 39,485 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। अन्य कारोबार आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में इसकी कुल गिरावट करीब 45 हजार रुपये तक पहुंची।
सोने की कीमतों में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। शुक्रवार को सोना 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 1,38,249 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2026 के बाद का सबसे कम भाव बताया गया है। सोने में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में इसकी कीमत करीब 5,400 रुपये घटी थी, जबकि अक्टूबर में 10,787 रुपये प्रति 10 ग्राम की अतिरिक्त गिरावट सामने आई।
महीने के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1 अक्टूबर को 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 30 अक्टूबर को यह घटकर 1,40,054 रुपये रह गई। इस तरह अक्टूबर में सोना 8,084 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। लगातार दो महीनों से जारी गिरावट ने सोने के बाजार में तेजी के पिछले रुख को कमजोर किया है।
दोनों धातुओं की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी हैं। चांदी का सर्वकालिक उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है। मौजूदा कीमतों के आधार पर इसमें रिकॉर्ड स्तर से करीब 57 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। वर्ष 2025 में चांदी ने लगभग 170 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी, लेकिन हालिया गिरावट ने उस बढ़त का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है। इसी तरह सोने का सर्वकालिक उच्च स्तर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है। मौजूदा भाव इससे 42,321 रुपये नीचे है।
कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है। सितंबर में अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) प्राइस इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मार्च के बाद सबसे अधिक थी। सालाना महंगाई दर भी बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गई।
ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है। निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उन्हें ब्याज या अन्य रिटर्न मिलने की संभावना हो।
इसके अलावा मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमले से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी दर्ज की गई। इससे वैश्विक महंगाई लंबे समय तक बने रहने की आशंका पैदा हुई है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती भी सोने-चांदी पर दबाव का एक कारण मानी जा रही है। तीसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रही, जो अनुमान से बेहतर बताई गई। मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश के कारण डॉलर को भी समर्थन मिला है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा है। हालांकि महंगाई के दबाव के चलते दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है और सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
