सुपर अल नीनो से भारत की आर्थिक विकास दर को खतरा, फसल उत्पादन घटेगा और महंगाई बढ़ेगीः IMF
न्यूयार्क। भारत (India) की आर्थिक विकास दर (Economic Growth Rate) को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने सुपर अल नीनो (Super El Niño) के संभावित खतरे के प्रति आगाह किया है। IMF के मुताबिक, मौसम में होने वाले इस बदलाव से फसलों का उत्पादन घट सकता है, खाद्य महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों की खरीदारी करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
जनवरी में भारत की ग्रोथ का दोबारा आकलन करेगा IMF
IMF की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूली कोजैक ने गुरुवार को कहा कि भारत के सामने सुपर अल नीनो से जुड़े कुछ खतरे हैं, लेकिन अभी तक ये हकीकत में सामने नहीं आए हैं।
जूली कोजैक ने कहा, “IMF जनवरी में जारी होने वाले अपने अगले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) अपडेट में भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान की दोबारा समीक्षा करेगा। यह समीक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि मौसम से जुड़े जोखिम किस तरह सामने आते हैं।”
भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान
बता दें IMF ने इसी महीने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया था। इससे पहले जुलाई में IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.4% और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 6.7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।
IMF के मुताबिक, भारत में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और सर्विस सेक्टर में भी अच्छी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। यही वजह है कि मौसम से जुड़े संभावित खतरों के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान मजबूत बना हुआ है।
क्या है सुपर अल नीनो और भारत को इससे क्या खतरा है?
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने से जुड़ी जलवायु संबंधी घटना है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है और भारत में मानसून की बारिश भी प्रभावित हो सकती है। अगर अल नीनो की स्थिति ज्यादा मजबूत होती है और बारिश में कमी आती है, तो इसका असर खेती और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
इसके तीन बड़े संभावित असर हैं
1. फसल उत्पादन में गिरावट: बारिश कम होने से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
2. खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी: अनाज, दालों और दूसरी खाने-पीने की चीजों की सप्लाई घटने पर कीमतें बढ़ सकती हैं।
3. आम लोगों के बजट पर दबाव: खाने-पीने की चीजें महंगी होने से परिवारों की खरीदारी करने की क्षमता कम हो सकती है।
हालांकि, इन आशंकाओं का मतलब यह नहीं है कि महंगाई या आर्थिक विकास पर असर पड़ना तय है। वास्तविक प्रभाव मौसम की स्थिति और कृषि उत्पादन में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
भारत की अर्थव्यवस्था पर रहेगी नजर
IMF ने फिलहाल भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में सुपर अल नीनो के संभावित असर को शामिल करके कोई नई कटौती नहीं की है। संगठन का कहना है कि घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की मजबूती से भारत की आर्थिक विकास दर को समर्थन मिल रहा है।
