October 24, 2026

शरद पूर्णिमा 2026 पर 30 साल बाद दुर्लभ संयोग की चर्चा, हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व

0
2-1792830316
नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रमा के दर्शन और रात्रि में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान गुणों वाला माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार 30 साल बाद दुर्लभ शुभ संयोग बनने की चर्चा के चलते भी इस पर्व को लेकर लोगों में उत्सुकता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व बताया जा रहा है। इन योगों को पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग को ज्योतिष में विभिन्न शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल समझा जाता है। वहीं, हर्षण योग को प्रसन्नता, उत्साह और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन योगों के प्रभाव से जीवन में होने वाले बदलाव धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं।

कोजागरी पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन उनकी आराधना के लिए जाग रहा है। इसी मान्यता से कोजागरी नाम जुड़ा है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है’। इस अवसर पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी की पूजा करके घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर रात में जागरण, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी किया जाता है। भक्तों के लिए यह रात पूजा, साधना और धार्मिक आस्था से जुड़ी मानी जाती है।

चांदनी में खीर रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से खीर बनाने तथा उसे रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। इसी विश्वास के आधार पर खीर को चांदनी में रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा देश के कई हिस्सों में श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। हालांकि, चंद्रमा की किरणों में विशेष औषधीय या अमृत जैसे गुण होने की मान्यता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं है।

शरद पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। शाम को चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है और खीर का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस प्रकार शरद पूर्णिमा धार्मिक आस्था, चंद्र उपासना और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा पर्व है। हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग को लेकर बताई जा रही ज्योतिषीय मान्यताएं इस अवसर को विशेष बनाती हैं। वहीं, मां लक्ष्मी की आराधना, भजन-कीर्तन, दान और चांदनी में खीर रखने की परंपरा इस पर्व की प्रमुख विशेषताएं हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *