अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार
दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 39.4 प्रतिशत बढ़कर 19,950.60 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 14,307.79 करोड़ रुपये था। इस दौरान ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई यानी ईबीआईटीडीए 45.7 प्रतिशत बढ़कर 8,743.22 करोड़ रुपये रही। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व 29.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17,014.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निरंतर परिचालन से ईबीआईटीडीए में 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6,320.97 करोड़ रुपये रहा।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच अदाणी पावर का शुद्ध लाभ लगभग दोगुना होकर 11,885.92 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल राजस्व 36 प्रतिशत बढ़कर 39,272.90 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेरसिंह बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी लाभप्रदता और परियोजनाओं को लागू करने के मामले में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की बिजली मांग 11.5 प्रतिशत बढ़कर 502 अरब यूनिट हो गई। कुल बिजली आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित उत्पादन की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत रही। इसी दौरान देश की अधिकतम बिजली मांग 18 प्रतिशत बढ़कर 270 गीगावाट तक पहुंच गई। बिजली की बढ़ती जरूरतों का असर कंपनी की बिक्री पर भी दिखाई दिया।
अदाणी पावर की बिजली बिक्री दूसरी तिमाही में बढ़कर 26.4 अरब यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 23.7 अरब यूनिट थी। कंपनी का प्लांट लोड फैक्टर यानी पीएलएफ 62.8 प्रतिशत से बढ़कर 70.1 प्रतिशत हो गया। पीएलएफ से पता चलता है कि किसी बिजली संयंत्र की उपलब्ध उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया। कंपनी की कुल परिचालन क्षमता 18,150 मेगावाट रही।
दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों के तहत बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़कर 23.4 अरब यूनिट हो गई। इस श्रेणी में प्रति यूनिट प्राप्त टैरिफ भी 12.7 प्रतिशत बढ़कर 6.4 रुपये रहा। इसके विपरीत, अल्पकालिक और मर्चेंट बाजार में प्रति यूनिट प्राप्ति 33.1 प्रतिशत बढ़कर 7.2 रुपये हो गई, लेकिन इस श्रेणी में बिक्री की मात्रा 43 प्रतिशत घट गई। कंपनी के मुताबिक, अतिरिक्त खुली क्षमता को मध्यम अवधि के बिजली आपूर्ति अनुबंधों में स्थानांतरित किए जाने के कारण ऐसा हुआ।
कंपनी का मानना है कि बिजली की बढ़ती मांग, औद्योगिक गतिविधियों और शहरीकरण से आने वाली तिमाहियों में क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, भविष्य का प्रदर्शन बिजली की मांग, उत्पादन, बिक्री और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
