सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता
डॉ. इलैयाराजा टी ने मध्यप्रदेश को भारत का दिल बताते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय परंपराएं और लोगों का आत्मीय व्यवहार पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में यात्रियों की रुचि नए स्थानों और स्थानीय जीवनशैली को करीब से जानने में बढ़ रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश अपनी विविध पर्यटन संभावनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित कर सकता है।
उन्होंने अत्यधिक पर्यटन दबाव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सीमित स्थानों और खास समय के दौरान पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान पर्यटन गतिविधियों को नए क्षेत्रों तक पहुंचाना और कम चर्चित स्थलों की खोज को प्रोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, नए गंतव्यों को पर्यटन मानचित्र पर लाने से यात्रियों को अलग अनुभव मिल सकते हैं और लोकप्रिय स्थानों पर भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में जंगल हैं। वन्यजीवों के मामले में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। इसके अलावा राज्य चीता, तेंदुआ, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। यहां के राष्ट्रीय उद्यान, वन क्षेत्र और प्राकृतिक रास्ते वन्यजीव प्रेमियों तथा प्रकृति के बीच समय बिताने के इच्छुक पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।
पेंच राष्ट्रीय उद्यान को मोगली और जंगल बुक की कहानियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। यहां की प्रकृति भ्रमण गतिविधियां पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के वातावरण को करीब से समझने का अवसर देती हैं। ऐतिहासिक ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग भी पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में सांची स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका के शैलचित्रों का विशेष स्थान है। प्रस्तुति में मध्यप्रदेश के 22 यूनेस्को धरोहर स्थलों का भी उल्लेख किया गया।
राज्य की पहचान उसके पारंपरिक हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ी है। मध्यप्रदेश में सात प्रमुख जनजातियों और 45 उप-जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं। चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, गोंड चित्रकला तथा भोपाल की जरी-जरदोजी कला स्थानीय शिल्प की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं के माध्यम से पर्यटक राज्य की सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के कौशल को समझ सकते हैं।
पर्यटन के नए अवसर विकसित करने के लिए राज्य में हेली पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि कम पहुंच वाले पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। मध्यप्रदेश ने स्पेनिश फिल्म आयोग के साथ समझौता कर अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी की है। महिला सफारी चालकों और महिलाओं द्वारा संचालित होटलों को सुरक्षित तथा जिम्मेदार पर्यटन के प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
डॉ. इलैयाराजा टी ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि किसी स्थान की असली सुंदरता केवल उसकी इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों में नहीं, बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार और आतिथ्य में भी दिखाई देती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को स्थानीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।
मध्यप्रदेश के खानपान को भी प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मालवा का पोहा-जलेबी, रतलामी सेव, पारंपरिक दाल-बाफला, मुरैना और ग्वालियर की गजक तथा नवाबी और बुंदेली शैली की मटन करी का उल्लेख किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि हेलीकॉप्टर संपर्क, सालभर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सव और सुरक्षित पर्यटन वातावरण राज्य की यात्रा को यादगार बनाने में मदद करेंगे।
