MP में निकायों में सामान खरीदी में बड़ी गड़बडी… कहीं 2 लाख का कचरा वाहन तो 6 लाख में!
भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी सामान की खरीदी में कीमतों के भारी अंतर का मामला सामने आया है। कहीं कचरा वाहन (Garbage Vehicle) दो लाख रुपये में खरीदा गया, तो कहीं उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन (Four Dustbins) के लिए छह लाख रुपये खर्च किए गए। एलईडी लाइट और केमिकल की खरीदी में भी कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है। इन मामलों को लेकर नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे (Additional Chief Secretary Sanjay Dubey) ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग निकायों की खरीदी और उन पर खर्च की गई राशि की जानकारी जुटा रहा है।
इस साल अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ दिन पहले भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगरीय विकास प्रशिक्षण संस्थान में नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें संजय दुबे खरीदी में कीमतों के अंतर और कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों को चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह न समझें कि उनकी गतिविधियों पर किसी की नजर नहीं है। विभाग को पता है कि किस निकाय ने क्या खरीदा और किस दर पर खरीदा।
दो लाख का वाहन, दूसरे निकाय में छह लाख खर्च
संजय दुबे ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक नगरीय निकाय ने कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन के लिए छह लाख रुपये खर्च किए। उन्होंने कुछ निकायों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाले वाहन खरीदे जाने का भी जिक्र किया। सवाल उठाया कि जिन निकायों में पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं, वहां इतने महंगे वाहनों की जरूरत क्यों पड़ी।
एलईडी लाइट की कीमत में भी भारी अंतर
मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक अंशुमान राज ने भी खरीदी की दरों में अंतर के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि एसडीएम के पद पर रहते हुए उन्हें 200 एलईडी बल्ब की खरीदी पर 60 लाख रुपये खर्च किए जाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने 60 वॉट की एलईडी लाइट का उदाहरण देते हुए बताया कि एक स्थान पर इसकी कीमत 306 रुपये थी, जबकि भोपाल में इसकी कीमत 11,800 रुपये दर्ज की गई। इसी तरह फिनोलिक डिसइन्फेक्टेंट (कीटाणुनाशक) की कीमत में भी असामान्य अंतर बताया गया। एक स्थान पर इसकी कीमत पांच रुपये प्रति लीटर, जबकि दूसरी जगह 33,500 रुपये लीटर में खरीदी की गई हैं।
250 करोड़ रुपये बचाने की संभावना
अंशुमान राज के अनुसार, सरदारपुर नगरीय निकाय ने 2,500 लीटर डिसइन्फेक्टेंट 1.35 लाख रुपये में खरीदा था। उन्होंने कहा कि यदि नगरीय निकाय औसत दरों पर खरीदी करें, तो विभाग करीब 250 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।
2500 यूजर आईडी-पासपर्ड लीक होने की जानकारी
प्रजेटेंशन में साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक गंभी चिता भी सामने आई। नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि गुगल पर पासवर्ड सर्कुलेट हो रहे थे। मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) में अतिरिक्त प्रबंध निदेशक ने बताया कि 2500 यूजर आईडी पासवर्ड लीक हुए। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ कंम्प्यूटरों में इन्फो-स्टीलर मैलवेयर मौजूद होने की आशंका हैं। अधिकारियों को सुरक्षा जांच कराने, एंटीवायरस का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही सरकारी और कार्यालयीन कंप्यूटरों पर अनधिकृत टोरेंट डाउनलोड, संदिग्ध ई-मेल और फिशिंग वेबसाइटों से बचने को कहा गया हैं।
इस साल शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी
संजय दुबे ने कहा कि पिछले साल उन्होंने ऐसे मामलों पर अधिक ध्यान नहीं दिया था, लेकिन इस साल अनियमितताओं की शिकायतें मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग अलग-अलग निकायों की खरीदी और उनकी दरों की जानकारी एकत्र कर रहा है। हालांकि, सामने आए उदाहरणों में बताई गई कीमतों के अंतर के कारणों और संबंधित खरीदी में किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में संजय दुबे से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
